Washington News: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इन दिनों अपनी नई पुस्तक के प्रचार से ज्यादा ईरान के साथ हुए अस्थायी शांति समझौते को लेकर सुर्खियों में हैं। विदेशों में अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप के पुराने आलोचक रहे वेंस अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तेहरान के बीच हुए इस समझौते के सबसे बड़े पैरोकार बन चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान समझौते की सफलता या विफलता न केवल ट्रंप प्रशासन बल्कि खुद जेडी वेंस के राजनीतिक भविष्य को तय करेगी। वेंस लगातार साक्षात्कारों और सार्वजनिक मंचों पर इस बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक समझौते का खुलकर बचाव कर रहे हैं।
स्विट्जरलैंड में वार्ता का अगला दौर
इस बड़े कूटनीतिक मिशन को आगे बढ़ाने के लिए शुक्रवार को जेडी वेंस के स्विट्जरलैंड जाने की संभावना है, जहां वे ईरान के साथ अगले चरण की सीधी वार्ता की शुरुआत करेंगे। यदि यह समझौता पूरी तरह सफल रहता है, तो वेंस की छवि एक बेहद परिपक्व और वैश्विक शांति दूत के रूप में स्थापित हो जाएगी।
वहीं दूसरी ओर, समझौते के विफल होने पर वेंस को इसकी भारी राजनीतिक कीमत भी चुकानी पड़ सकती है। खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर मजाकिया अंदाज में कहा कि अगर यह ऐतिहासिक समझौता कामयाब रहा तो श्रेय मैं लूंगा, और अगर यह असफल रहा तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जेडी वेंस की होगी।
अमेरिका में समझौते पर छिड़ी रार
इस बीच, जैसे ही शांति समझौते के मसौदे को सार्वजनिक किया गया, पूरे अमेरिका में इस पर तीखी बहस छिड़ गई है। कई रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों के साथ-साथ इजरायल समर्थक समूहों ने भी इस समझौते की कानूनी और रणनीतिक शर्तों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आलोचकों का साफ कहना है कि इस शुरुआती मसौदे में ईरान को बहुत ज्यादा और सीधे लाभ मिलते दिख रहे हैं, जबकि उसके खतरनाक परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे अभी भी पूरी तरह अनसुलझे हैं, जो भविष्य में दुनिया के लिए खतरा बन सकते हैं।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन सभी तीखी आलोचनाओं का कड़ा जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि समझौते का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब ईरान अपनी सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं का पूरी तरह पालन करेगा। उन्होंने साफ किया कि सरकार हर कदम पर पूरी सावधानी बरत रही है।
वेंस ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि यह संघर्ष किसी भी हाल में इराक युद्ध जैसी दलदल वाली स्थिति नहीं बनने वाला है। ट्रंप प्रशासन की नीति का मुख्य उद्देश्य लंबे और अलोकप्रिय सैन्य खर्चों से बचते हुए कूटनीतिक और शांतिपूर्ण समाधान खोजना है, जिससे अमेरिकी नागरिकों का हित सुरक्षित रहे।
Author: Pallavi Sharma


