रामपुर में मातृ मृत्यु दर में 37 फीसदी की कमी, तीन साल में संस्थागत प्रसव भी बढ़ा

Rampur News: सरकार की योजनाओं और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे प्रयासों का सुखद परिणाम मिला है। जिले में मातृ मृत्यु दर में कमी आई है। पिछले तीन साल में यह दर 37 फीसदी घटी है। वहीं संस्थागत प्रसव का आंकड़ा नौ फीसदी तक बढ़ा है। जिले में सरकारी अस्पतालों का बड़ा नेटवर्क है। मुख्यालय पर जिला पुरुष और जिला महिला संयुक्त अस्पताल संचालित है। तहसील क्षेत्रों में पांच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और ब्लाक स्तर पर तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इसके अलावा अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की संख्या भी तीन दर्जन से अधिक है।

तीन साल में कैसे घटी मातृ मृत्यु दर?

सरकार कीमंशा है कि अधिक से अधिक प्रसव अस्पतालों में हों, ताकि मातृ मृत्यु दर को कम किया जा सके। इसके लिए सरकारी अस्पतालों में प्रसव की सुविधा बढ़ाई जा रही है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के माध्यम से महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए जागरूक किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2023-24 में 49,269 संस्थागत प्रसव हुए थे, जिसमें 52 महिलाओं की मृत्यु हो गई थी। तब मातृ मृत्यु दर 105 थी। वर्ष 2024-25 में संस्थागत प्रसव की संख्या बढ़कर 53,513 पहुंच गई और मातृ मृत्यु दर घटकर 88 रह गई। इस अवधि में 47 महिलाओं की प्रसव के बाद मृत्यु हुई थी।

चालू वित्त वर्ष में मृत्यु दर 61 पर आई

चालूवित्त वर्ष 2025-26 में अब तक 53,748 प्रसव हो चुके हैं, जिसमें 33 महिलाओं की मृत्यु हुई। इस तरह मृत्यु दर घटकर 61 रह गई है। तीन सालों के आंकड़े बताते हैं कि संस्थागत प्रसव की संख्या लगातार बढ़ रही है और मातृ मृत्यु दर में गिरावट आ रही है। जिला मातृ स्वास्थ्य परामर्शदाता मोहम्मद कासिम खां का कहना है कि वर्ष 2019 में उन्होंने यहां कार्यभार लिया था। तब यहां 22 अस्पतालों में प्रसव की सुविधा थी, जिसे बढ़ाकर अब 41 अस्पतालों में कर दिया गया है। जिला महिला अस्पताल और सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य और ऑपरेशन से प्रसव की सुविधा है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध है।

अगले वित्त वर्ष में 20 प्रसव केंद्र और बढ़ाने का लक्ष्य

सरकार कालक्ष्य है कि अधिक से अधिक महिलाओं को संस्थागत प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए प्रसव केंद्रों की संख्या बढ़ाई जा रही है। अगले वित्त वर्ष तक 20 नए प्रसव केंद्र खोलने का लक्ष्य रखा गया है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चला रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि निरंतर प्रयासों से मातृ मृत्यु दर में और कमी लाई जा सकेगी। बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और जागरूकता के चलते अब अधिक महिलाएं अस्पतालों में प्रसव कराने आ रही हैं। यह सरकारी योजनाओं की सफलता का बड़ा उदाहरण है। स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अगले वित्त वर्ष में मातृ मृत्यु दर को और नीचे लाने का है।

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