Himachal News: हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य के न्यायिक ढांचे की खस्ता हालत पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश जी.एस. संधावालिया की अगुवाई वाली पीठ ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार के रवैये को केवल ‘खोखले वादे’ कहा है। इस भारी लापरवाही के लिए अदालत ने सरकार पर दस लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायालय ने सरकार को कड़ी चेतावनी भी दी है। सुधार न होने पर सख्त कार्रवाई होगी।
अदालत के आदेशों की अनदेखी
न्यायालय ने राज्य में न्यायिक सुविधाओं की भारी कमी पर खुद संज्ञान लिया है। अदालत ने प्रदेश में 34 नई अदालतें और नए न्यायिक पद बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए थे। लेकिन राज्य सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। तीन महीने बीत जाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ है। सरकार ने बिन जरूरत वाले इलाकों में अदालतें खोलने का प्रस्ताव दिया। अदालत ने इस रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है।
कैबिनेट में अटके अहम प्रस्ताव
सिविल जज और अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के पदों से जुड़े प्रस्ताव अभी तक कैबिनेट में ही अटके पड़े हैं। इस लेटलतीफी पर भी उच्च न्यायालय ने सरकार को जमकर लताड़ लगाई है। इसके अलावा प्रदेश में एनडीपीएस एक्ट के तहत लगातार बढ़ते मामलों पर भी गहरी चिंता जताई गई है। अदालत ने साफ कहा कि बुनियादी ढांचे के बिना विशेष अदालतें बिल्कुल नहीं बनाई जा सकती हैं। राज्य सरकार सभी उम्मीदों पर पूरी तरह विफल रही है।
अगली सुनवाई और बजट का ब्यौरा
केंद्र सरकार के लगातार आग्रह के बाद भी राज्य में पर्याप्त एनडीपीएस अदालतें नहीं बन सकी हैं। इससे पूरी न्यायिक प्रक्रिया काफी प्रभावित हो रही है। अब उच्च न्यायालय ने राज्य के वित्त सचिव को कड़े निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने न्यायपालिका के लिए आगामी बजट प्रावधान का पूरा ब्यौरा पेश करने को कहा है। सरकार को जुर्माने की राशि कोर्ट रजिस्ट्री में तुरंत जमा करनी होगी। इस अहम मामले की अगली सुनवाई 4 मई को होगी।


