रूस में नौकरी का झांसा और फिर बंदूक की नोक पर सेना में भर्ती, ‘बॉडी बैग’ में लौटा हरियाणा का लाल

Haryana News: बेहतर भविष्य की चाह में रूस गए हरियाणा के एक युवक की दर्दनाक मौत हो गई है। फतेहाबाद के कुम्हारिया गांव का 23 वर्षीय अंकित जांगड़ा एक ‘बॉडी बैग’ में घर लौटा है। अंकित को धोखे से रूसी सेना में भर्ती किया गया था। इस घटना ने विदेश जाने वाले सैकड़ों भारतीय युवाओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में भारी मातम पसरा हुआ है।

स्टडी वीजा पर मॉस्को गया था अंकित

अंकित जांगड़ा फरवरी 2025 में स्टडी वीजा पर रूस की राजधानी मॉस्को गया था। उसने वहां एक कॉलेज में भाषा के कोर्स में दाखिला लिया था। अपना खर्च निकालने के लिए वह एक रेस्टोरेंट में पार्ट-टाइम नौकरी कर रहा था। इसी दौरान एक महिला एजेंट ने उसे और उसके दोस्त विजय पूनिया को ऊंचे वेतन का लालच दिया। पढ़ाई और नौकरी के नाम पर गए इन मासूम युवाओं को साजिश के तहत रूसी सेना में झोंक दिया गया।

बंदूक की नोक पर सेना में जबरन भर्ती

रूसी अधिकारियों ने इन भारतीय युवकों को जबरदस्ती युद्ध के मैदान में उतार दिया। जब इन युवाओं ने घर लौटने की जिद की, तो उन पर बंदूक तान दी गई। उन्हें साफ कह दिया गया कि वापस जाने का कोई रास्ता नहीं है। अंकित के साथ हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के करीब पंद्रह अन्य युवक भी फंसे हुए थे। इन लड़कों को महज ब्रेड और जैम पर जिंदा रखा जा रहा था और उन्हें प्रताड़ित किया गया।

यूक्रेन युद्ध क्षेत्र में टूटी आखिरी उम्मीद

अंकित ने अपनी आखिरी बातचीत में परिवार को बताया था कि उन्हें रूस से बहुत दूर कब्जे वाले इलाके सेलिडोव में रखा गया है। 10 सितंबर 2025 को अंकित ने फोन पर अपनी जान की भीख मांगी थी। उसने कहा था कि किसी भी पल उनकी जान जा सकती है। उस कॉल के महज चौबीस घंटे बाद अंकित से हमेशा के लिए संपर्क टूट गया। महीनों के लंबे इंतजार के बाद परिवार को उसके निधन की मनहूस खबर मिली।

परिवार की अंतहीन गुहार और सरकार का रुख

अंकित के बड़े भाई रघुवीर और पूरे परिवार ने उसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश की। उन्होंने विदेश मंत्रालय, रूसी दूतावास और रक्षा मंत्रालय से बार-बार मदद मांगी। भारत सरकार ने रूस से धोखे से भर्ती हुए भारतीयों को छोड़ने का अनुरोध किया है। युद्ध की जटिलताओं के कारण यह प्रक्रिया बेहद धीमी साबित हो रही है। अब अंकित का शव गांव पहुंचने के बाद ग्रामीण महिला एजेंट पर तुरंत कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

लापता दोस्त विजय पूनिया की तलाश तेज

अंकित की मौत के बाद अब परिवार की चिंता उसके दोस्त विजय पूनिया को लेकर बढ़ गई है। विजय का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। अंकित की यह दर्दनाक कहानी कोई इकलौती घटना नहीं है। हाल ही में ऐसे कई अन्य मामले भी सामने आ चुके हैं। भारत में सक्रिय एजेंट सोशल मीडिया के जरिए बेरोजगार युवाओं को अपना निशाना बना रहे हैं। ग्रामीण अब सरकार से अन्य लापता युवाओं को सुरक्षित वापस लाने की लगातार गुहार लगा रहे हैं।

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