Iran News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। 28 फरवरी से शुरू हुए इस महायुद्ध में पहली बार ईरानी सरजमीं पर एक अमेरिकी एफ-15ई लड़ाकू विमान को मार गिराया गया है। यह घटना अमेरिकी सेना के लिए एक बड़ा झटका मानी जा रही है। इस विमान में सवार दो अमेरिकी सैनिकों में से एक को बचा लिया गया है। वहीं दूसरा अमेरिकी सैनिक अभी भी लापता है और उसे खोजने की होड़ मची है।
ईरान ने लापता अमेरिकी सैनिक पर रखा भारी इनाम
अमेरिकी एफ-15ई विमान को दो सैनिक मिलकर उड़ाते हैं। इनमें एक पायलट और एक हथियार प्रणाली अधिकारी शामिल होता है। अमेरिकी सेना ने अपने एक सैनिक को सुरक्षित निकाल लिया है। लेकिन लापता सैनिक को पकड़ने के लिए ईरान ने पूरी ताकत झोंक दी है। ईरानी मीडिया ने आम नागरिकों के लिए एक बड़ा सार्वजनिक ऐलान किया है। इस घोषणा में साफ कहा गया है कि दुश्मन पायलट को जिंदा पकड़ने वाले नागरिक को एक बड़ा नकद इनाम और खास बोनस दिया जाएगा।
क्या 1979 का खौफनाक अमेरिकी बंधक संकट दोहराएगा?
लापता पायलट की तलाश ने वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक खतरनाक रेस शुरू कर दी है। अगर ईरान इस वायुसैनिक को पकड़ लेता है तो यह अमेरिका के लिए पुरानी यादें ताजा कर देगा। ईरान पहले भी कई अमेरिकी कर्मियों को बंधक बना चुका है। करीब पांच दशक पहले चार नवंबर 1979 को एक बड़ी घटना घटी थी। तब कुछ ईरानी छात्रों ने तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास पर सीधा हमला बोल दिया था। उन्होंने 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया था।
ईरानी सेना ने 2016 में भी पकड़े थे अमेरिकी नाविक
साल 1979 में ईरान ने 52 अमेरिकियों को 444 दिनों तक बंधक बनाकर रखा था। बाद में बीस जनवरी 1981 को राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के शपथ ग्रहण के बाद उन्हें रिहा किया गया था। इसके बाद 12 जनवरी 2016 को भी एक ऐसी ही घटना हुई थी। कुवैत से बहरीन जा रही अमेरिकी नौसेना की दो नावें गलती से ईरानी जल क्षेत्र में घुस गई थीं। तब ईरानी सेना ने नौ पुरुष और एक महिला अमेरिकी नाविक को हथियार के बल पर पकड़ लिया था।
अमेरिकी विदेश मंत्री के सीधे दखल के बाद हुई रिहाई
वर्ष 2016 में ईरानी सेना ने अमेरिकी नाविकों की आंखों पर पट्टी बांध दी थी। सैनिकों ने इन नाविकों को घुटनों के बल बिठाकर उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाए थे। इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने तुरंत ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ को फोन मिलाया। दोनों नेताओं के बीच कई बार फोन पर बातचीत हुई। भारी कूटनीतिक दबाव और लंबी बातचीत के बाद पंद्रह घंटे के भीतर ही ईरान ने सभी दस नाविकों को सुरक्षित रिहा कर दिया था।
ब्रिटिश सैनिकों को भी हिरासत में ले चुका है ईरान
अमेरिका के अलावा ईरान ने ब्रिटिश सैनिकों को भी अपनी हिरासत में लिया है। मार्च 2007 में ईरानी नौसेना ने पंद्रह ब्रिटिश नाविकों और मरीन सैनिकों को बंदूक की नोक पर पकड़ लिया था। तब वे फारस की खाड़ी में व्यापारिक जहाजों का नियमित निरीक्षण कर रहे थे। ब्रिटेन ने दावा किया था कि उसके सैनिक इराकी जलक्षेत्र में मौजूद थे। लेकिन ईरान ने उन पर अपनी सीमा में अवैध रूप से घुसने का आरोप लगाया था।
टीवी पर माफी मांगने के बाद हुई थी ब्रिटिश रिहाई
ईरान द्वारा ब्रिटिश सैनिकों को पकड़ने की यह कोई इकलौती घटना नहीं थी। इससे पहले साल 2004 में भी ईरान ने आठ ब्रिटिश सैनिकों को तीन दिनों तक अपनी हिरासत में रखा था। उस समय इन सैनिकों की नावें पानी में बहकर ईरानी जलक्षेत्र में चली गई थीं। हिरासत के दौरान ईरानी सैनिकों ने उनकी आंखों पर पट्टी बांधकर कड़ी पूछताछ की थी। बाद में रिहा करने से पहले ईरान ने नेशनल टेलीविजन पर उनसे जबरन माफीनामा भी पढ़वाया था।


