New Delhi News: राष्ट्रीय राजधानी में कूड़ा प्रबंधन की चुनौती अब भी बरकरार है। दिल्ली में उत्पन्न होने वाले कुल कचरे का 37 प्रतिशत हिस्सा बिना किसी निस्तारण के सीधे लैंडफिल साइटों पर डाला जा रहा है। इससे कूड़े के पहाड़ खत्म करने के प्रयासों में सफलता नहीं मिल पा रही है। दिल्ली सरकार के आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार, शहर में प्रतिदिन 11,862 टन कचरा उत्पन्न होता है। इसमें से नगर निगम के पास केवल 7,641 टन प्रतिदिन निस्तारित करने की क्षमता है, जो कुल कचरे का 64.4 प्रतिशत है।
केवल 64.4 फीसदी कचरे की निस्तारण क्षमता
सर्वेक्षण केअनुसार, उत्पन्न कचरे में से 62.9 प्रतिशत को कूड़े से बिजली बनाने वाले संयंत्रों और मेटेरियल रिकवरी सेंटर के जरिए निस्तारित किया जाता है। 558 टन प्रतिदिन कचरे का उपयोग खाद बनाने में होता है। 293 टन प्रतिदिन कचरे को रिसाइकिल किया जाता है। लेकिन 37.1 प्रतिशत कचरा बिना किसी प्रसंस्करण के सीधे लैंडफिल साइटों पर पहुंच जाता है। निगम ने निस्तारण क्षमता बढ़ाने के लिए कार्ययोजना बनाई है, लेकिन वर्तमान स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। तीनों लैंडफिल साइटों पर अब भी 120 लाख टन पुराना कचरा जमा है।
लैंडफिल साइटों की समयसीमा खत्म करने में मुश्किल
निगम नेलैंडफिल साइटों को खत्म करने की समयसीमा तय कर रखी है। ओखला लैंडफिल को जुलाई 2026, भलस्वा लैंडफिल को दिसंबर 2026 और गाजीपुर लैंडफिल को दिसंबर 2027 तक खत्म करने का लक्ष्य है। लेकिन मौजूदा निस्तारण दर और कचरे की मात्रा को देखते हुए यह कार्य तय समय में पूरा होना मुश्किल लग रहा है। सर्वेक्षण के अनुसार, 2022 में तीनों लैंडफिल पर 203 लाख मीट्रिक टन कचरा था। अब भी 120 लाख टन कचरा बचा है। निस्तारण की गति बढ़ाने के लिए निगम ने नए संयंत्रों की योजना बनाई है।
निस्तारण क्षमता बढ़ाने की योजना
निस्तारण क्षमताबढ़ाने के लिए निगम ने कई योजनाएं बनाई हैं। ओखला और तेहखंड में कूड़े से बिजली बनाने वाले संयंत्रों की क्षमता 1000-1000 टन प्रतिदिन बढ़ाई जाएगी। गाजीपुर में 2000 टन प्रतिदिन का नया संयंत्र दिसंबर 2028 तक स्थापित करने की योजना है। नरेला बवाना में 3000 टन प्रतिदिन क्षमता का संयंत्र दिसंबर 2027 तक बनाने का प्रस्ताव है। आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, निस्तारण में पिछले वर्षों में तेजी आई है। 2022-23 में 21.90 लाख टन, 2024 में 54.34 लाख टन, 2025 में 29.93 लाख टन कचरा निस्तारित हुआ। सर्वाधिक 74.11 लाख टन कचरा 2025-26 में निस्तारित हो चुका है। लेकिन कचरा उत्पादन की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए लैंडफिल साइटों को पूरी तरह खत्म करना अभी बड़ी चुनौती बनी हुई है।


