Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में कार्यरत हजारों मिड डे मील वर्कर्स ने बाईस जून यानी सोमवार को प्रदेशव्यापी पूर्ण हड़ताल का बड़ा ऐलान किया है। सीटू से संबद्ध मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले राज्यभर की महिला कार्यकर्ता अपना काम पूरी तरह बंद रखेंगी। वे शिमला में सचिवालय तक विशाल रैली निकालेंगी।
टालैंड से सचिवालय तक दोपहर को निकलेगा विरोध मार्च
यूनियन के वरिष्ठ राज्य प्रभारी जगत राम ने बताया कि सभी जिलों से आईं कार्यकर्ता सुबह ग्यारह बजे शिमला के टालैंड के पास एकत्रित होंगी। इसके बाद साढ़े ग्यारह बजे सचिवालय के लिए पैदल मार्च शुरू होगा। अपनी लंबित मांगों को लेकर ये कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ सचिवालय के मुख्य गेट के बाहर बड़ा प्रदर्शन करेंगी
यूनियन का आरोप है कि दोनों सरकारें उनकी आर्थिक मांगों को लंबे समय से नजरअंदाज कर रही हैं। पिछले सत्रह वर्षों से मिड डे मील कार्यकर्ताओं के बेसिक मानदेय में एक रुपये की भी सम्मानजनक बढ़ोतरी नहीं की गई है। महिला सशक्तिकरण के दावों के बीच इन महिला कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति दिन-प्रतिदिन खराब हो रही है।
हाई कोर्ट के आदेशों को लागू करने की मांग
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की एकल और खंडपीठ ने इन वर्कर्स को दस महीने के बजाय पूरे बारह महीने की सैलरी देने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया था। राज्य सरकार ने इस अदालती आदेश को अब तक लागू नहीं किया है। इन कार्यकर्ताओं को सालभर कोई निर्धारित वीकली ऑफ या पेड लीव भी नहीं दी जाती है।
वर्कर्स को कई बार तीन-तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता और भुगतान भी हमेशा किस्तों में होता है। स्कूलों में छात्रों की संख्या पच्चीस से कम होने पर छंटनी की तलवार लटकने लगती है, इसलिए यूनियन इस शर्त को तुरंत हटाने की मांग कर रही है। चुनाव ड्यूटी में भोजन बनाने का भी कोई अतिरिक्त मानदेय नहीं मिलता।
यूनियन ने मांग की है कि हिमाचल में भी हरियाणा की तर्ज पर सात हजार रुपये न्यूनतम मासिक वेतन दिया जाए। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तरह फिक्स छुट्टियां, पहली तारीख को एकमुश्त मानदेय, ग्रेच्युटी, पेंशन और मेडिकल खर्च की सुविधा मिले। मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने के बाद मांगें न मानने पर उग्र आंदोलन शुरू होगा।

