Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश ने अपनी शिक्षा व्यवस्था में अभूतपूर्व सुधार करते हुए शून्य नामांकन वाले स्कूलों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके बावजूद राज्य में 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 64,055 किशोरों का स्कूलों से बाहर होना शिक्षा विभाग और सरकार के लिए एक गहरी चिंता का विषय बन गया है।
उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में उठा ड्रॉपआउट का गंभीर मुद्दा
शिमला में आयोजित उत्तरी क्षेत्रीय परिषद की स्थायी समिति की 22वीं बैठक में इस गंभीर विषय पर विस्तृत चर्चा हुई। आंकड़ों के अनुसार, स्कूल छोड़ने वाले इन किशोरों में 29,795 लड़के और 34,260 लड़कियां शामिल हैं। माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर पर बच्चों को स्कूल में बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
अन्य राज्यों के मुकाबले हिमाचल प्रदेश की स्थिति काफी बेहतर
हालांकि ड्रॉपआउट के मामले में हिमाचल की स्थिति पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे पड़ोसी राज्यों से काफी बेहतर है। उत्तरी क्षेत्र में कुल 28,19,966 बच्चे शिक्षा से बाहर हैं, जबकि पूरे देश में यह आंकड़ा दो करोड़ से अधिक है। हिमाचल सरकार अब इन बच्चों को दोबारा स्कूल लाने के लिए विशेष योजना बना रही है।
लड़के और लड़कियों के स्कूल छोड़ने के पीछे के मुख्य कारण
हिमाचल में लड़कों के स्कूल छोड़ने की मुख्य वजह परिवार की आय बढ़ाने के लिए काम करना है। वहीं, लड़कियों में घरेलू जिम्मेदारियां, आर्थिक तंगी और शिक्षा को कम महत्व देना प्रमुख कारण हैं। राज्य में एकल शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या भी अब 3,473 से घटकर 2,964 रह गई है।
Reported By: Sunita Gupta, Himachal Pradesh


