Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों से एक बेहद चौंकाने वाली मेडिकल सर्वे रिपोर्ट सामने आई है। जनजातीय विकास विभाग की इस आधिकारिक रिपोर्ट ने प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि इन सुदूर पहाड़ी इलाकों में रहने वाला हर पांचवां व्यक्ति यौन संचारित रोग (एसटीडी) से पीड़ित है।
चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति में हुआ बड़ा सर्वे
इस महत्वपूर्ण शोध अध्ययन को आईजीएमसी शिमला के सामुदायिक चिकित्सा विभाग के सहयोग से तैयार किया गया है। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ओन्कार चंद शर्मा ने इस आधिकारिक रिपोर्ट को सार्वजनिक किया। इस विशेष सर्वे के तहत चंबा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिलों के 3,000 नागरिकों को शामिल कर डेटा जुटाया गया है।
स्वास्थ्य विभाग की इस विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार जनजातीय क्षेत्रों के 20 प्रतिशत लोग सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज से ग्रसित मिले हैं। जिला चंबा में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। चंबा में सबसे अधिक 24.2 प्रतिशत लोगों में संक्रमण के लक्षण मिले हैं। वहीं किन्नौर जिले में यह आंकड़ा 20.1 प्रतिशत दर्ज हुआ है।
सुरक्षा नियमों से भारी खिलवाड़ और कंडोम का कम इस्तेमाल
इस क्षेत्र में लाहौल-स्पीति के मात्र 25 प्रतिशत लोगों ने ही सुरक्षा के लिए कंडोम का इस्तेमाल करने की बात मानी है। करीब एक-तिहाई आबादी ने स्वीकार किया कि उन्होंने जीवन में कभी भी इसका उपयोग नहीं किया। इसके अलावा दो फीसदी लोगों ने पैसों या अन्य लाभ के बदले शारीरिक संबंध बनाने की बात स्वीकारी है।
जांच दल ने पाया कि सामाजिक झिझक के कारण महिलाएं अपने यौन एवं प्रजनन स्वास्थ्य पर खुलकर बात नहीं करती हैं। हालांकि सर्वे में शामिल 72 प्रतिशत लोगों ने इस बीमारी के बारे में सिर्फ सुन रखा है। लेकिन उनके पास बचाव और सही इलाज को लेकर पूरी एवं सटीक जानकारी का भारी अभाव है।
शराब और तंबाकू के सेवन ने बढ़ाई गंभीर बीमारी
इस मेडिकल सर्वे में नागरिकों की अन्य बुरी आदतों को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। सर्वे में शामिल 52 प्रतिशत लोगों ने नियमित रूप से शराब पीने की बात कबूल की है। इसके अलावा एक-तिहाई से अधिक आबादी सिगरेट-बीड़ी पीती है या फिर किसी न किसी रूप में तंबाकू खाती है।
इलाज के मामले में 90 प्रतिशत से अधिक लोग अस्पताल जरूर गए लेकिन उन्होंने अपना इलाज बीच में ही अधूरा छोड़ दिया। बीमारी से पीड़ित अपने पार्टनर का इलाज कराने वालों की संख्या सिर्फ 3 प्रतिशत है। वहीं केवल दो प्रतिशत जनता ने कभी एचआईवी या हेपेटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियों की लैब जांच करवाई है।
स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए सरकार करेगी काम
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस शोध के निष्कर्ष भविष्य में जनजातीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने में मददगार साबित होंगे। इस रिपोर्ट में दी गई सभी महत्वपूर्ण सिफारिशों पर समय सीमा के भीतर उचित कानूनी एक्शन लिया जाएगा। दूरदराज के गांवों में आधुनिक स्वास्थ्य केंद्रों की पहुंच मजबूत की जाएगी।
इस रिपोर्ट के विमोचन अवसर पर जॉइंट सेक्रेटरी डॉ. विक्रम सिंह नेगी और अनुसंधान अधिकारी डॉ. रूपल सूद मौजूद रहे। उनके साथ प्रधान अन्वेषक प्रोफेसर डॉ. अनमोल गुप्ता, सहायक प्रोफेसर डॉ. अमित सचदेवा और जूनियर रेजिडेंट डॉ. अर्चित शर्मा ने भी इस गंभीर विषय पर अपनी चिंता व्यक्त की है।
Reported By: Asha Thakur


