हिमाचल में सरकारी शिक्षकों की नियुक्तियों पर फिरा पानी, कैबिनेट सब-कमेटी की बैठक टली, हजारों चयनित उम्मीदवारों का बढ़ा इंतजार

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों में सरकारी नौकरी की राह देख रहे हजारों चयनित शिक्षकों को तगड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार ने स्कूल आवंटन और तैनाती को लेकर आज 19 जून को होने वाली कैबिनेट सब-कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक को अचानक टाल दिया है।

शिक्षा सचिव के शिमला लौटने के बाद ही होगा अंतिम फैसला

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार शिक्षा सचिव राकेश कंवर इस समय राज्य से बाहर गए हुए हैं। वे आगामी 22 जून को शिमला वापस लौटेंगे। उनके आने के बाद ही डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में इस विशेष कमेटी की समीक्षा बैठक दोबारा आयोजित की जाएगी।

इस हाई-लेवल मीटिंग में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर और तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी भी मुख्य रूप से शामिल होंगे। तब तक चयनित शिक्षकों को पोस्टिंग के लिए थोड़ा और सब्र करना होगा। इस प्रशासनिक देरी से उम्मीदवारों में थोड़ी निराशा जरूर देखी जा रही है।

प्रतिस्पर्धी शिक्षा के लिए 158 सरकारी स्कूल हुए सीबीएसई संबद्ध

राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया था। इसके तहत प्रदेश के कुल 158 सरकारी स्कूलों को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई से संबद्ध किया गया है, जो एक बड़ा बदलाव है।

इनमें से 147 प्रमुख स्कूलों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए शिक्षा विभाग ने एक कड़ा स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित किया था। इस विशेष परीक्षा में पूरे हिमाचल प्रदेश से कुल 9,821 अनुभवी शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया था।

मेरिट लिस्ट के 6,084 शिक्षकों को काउंसलिंग पर रोक से झटका

कड़े मुकाबले के बाद घोषित हुए परीक्षा परिणाम में से 6,084 शिक्षक ही फाइनल मेरिट लिस्ट में अपनी जगह बनाने में कामयाब हो सके। इसके बाद विभाग ने मेरिट और चॉइस के आधार पर स्कूलों के आवंटन की आधिकारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी।

विभाग ने काउंसलिंग की पूरी तैयारी कर ली थी लेकिन ऐन वक्त पर नीतिगत कारणों से इस प्रक्रिया को बीच में ही रोक दिया गया। इसके बाद से ही सभी पास उम्मीदवार पसंदीदा स्कूलों में अपनी पहली ज्वाइनिंग मिलने की बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं।

तबादलों और नई नियुक्तियों में संतुलन बनाना बड़ी चुनौती

राज्य सरकार के सामने सबसे पेचीदा काम इन नए स्कूलों में न्यू ज्वाइनिंग और पहले से तैनात शिक्षकों के ट्रांसफर के बीच एक सही संतुलन बनाना है। इसी वजह से फाइनल डिसीजन लेने से पहले प्रशासनिक स्तर पर कई तरह के विकल्पों पर विचार हो रहा है।

आगामी बैठक में यह तय होगा कि तैनाती सिर्फ मेरिट से होगी या फिर वरिष्ठता को अधिमान मिलेगा। बता दें कि 147 स्कूलों में 5,623 खाली पदों को भरने के लिए स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला के माध्यम से यह पूरा रिक्रूटमेंट प्रोसेस शुरू किया गया था।

Reported By: Sunita Gupta

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