स्मार्टफोन चोरी होने के बाद सिर्फ ‘ब्लिंकिंग डॉट’ बनकर रह गई तकनीक, जानिए क्यों फेल हो रहे हैं ट्रैकिंग सिस्टम

Delhi News: स्मार्टफोन चोरी होने के बाद आम तौर पर पीड़ितों को भरोसा होता है कि ‘Find My Device’ और सरकार का CEIR पोर्टल उनके फोन को आसानी से ढूंढ लेगा। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग और चौंकाने वाली है। इन दोनों ही आधुनिक तकनीकी सुविधाओं की कई गंभीर कमियां अब खुलकर सामने आ रही हैं।

लोकेशन मिलने के बाद भी बेबस नजर आ रही पुलिस

राजधानी दिल्ली के कश्मीरी गेट, जगतपुरी और सीलमपुर जैसे कई इलाकों से लगातार ऐसी शिकायतें आ रही हैं। दर्जनों पीड़ितों ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है। उनका कहना है कि वे अपने चोरी हुए फोन की लाइव लोकेशन पुलिस को दे रहे हैं, इसके बावजूद पुलिस चोरों को पकड़ने में नाकाम साबित हो रही है।

एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि उनका महंगा आईफोन कई दिनों से एक ही इलाके में दिखाई दे रहा है। जब वे पुलिस के पास गए, तो अधिकारियों ने कहा कि केवल घनी आबादी वाले स्लम का इलाका दिख रहा है, लेकिन सटीक घर या कमरा नंबर न होने के कारण वे छापेमारी नहीं कर सकते।

आखिर क्यों फेल हो रहे हैं ये दोनों बड़े सिस्टम?

इन ट्रैकिंग सिस्टम्स के नाकाम होने के पीछे कई बड़े तकनीकी और व्यावहारिक कारण हैं। गूगल और ऐपल के ट्रैकिंग टूल घनी आबादी वाले क्षेत्रों में सिर्फ एक सामान्य दायरा दिखाते हैं। वहां सैकड़ों बहुमंजिला मकान और तंग गलियां होती हैं, जहां बिना सटीक पते के पुलिस के लिए कार्रवाई करना बेहद चुनौतीपूर्ण होता है।

इसके अलावा, अक्सर लोकेशन अपडेट होने में कई दिनों या हफ्तों की देरी हो जाती है। जब तक पुलिस टीम मौके पर पहुंचती है, तब तक शातिर चोर फोन के कलपुर्जे अलग कर चुके होते हैं। सरकार का CEIR पोर्टल भी मुख्य रूप से सिर्फ IMEI नंबर ब्लॉक करने का काम करता है, रियल-टाइम ट्रैकिंग में यह प्रभावी नहीं है।

चोरों के पास मौजूद हैं कई आसान बाईपास

आजकल के शातिर चोर भी तकनीक के मामले में काफी आगे निकल चुके हैं। वे फोन छीनते ही उसे तुरंत एयरप्लेन मोड पर डाल देते हैं और सिम कार्ड निकाल देते हैं। हालांकि ऐपल का एक्टिवेशन लॉक काफी मजबूत माना जाता है, लेकिन चोर एंड्रॉइड फोन को आसानी से फैक्टरी रीसेट कर देते हैं।

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भी माना कि ये तकनीकी सुविधाएं जांच में केवल ‘सहायक’ हैं, लेकिन चोरों को पकड़ने के लिए ‘पर्याप्त’ नहीं हैं। जब तक पिनपॉइंट लोकेशन और तुरंत एक्शन का तालमेल नहीं बैठता, तब तक घनी आबादी वाले स्लम एरिया में लॉजिस्टिक समस्याओं के कारण चोर आसानी से बच निकलते हैं।

तकनीक में बड़े सुधार की है सख्त जरूरत

साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन सुविधाओं को और ज्यादा अपग्रेड करने की जरूरत है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित प्रेडिक्टिव लोकेशन, पुलिस के लिए एक डायरेक्ट डैशबोर्ड और फोन चोरी होते ही ऑटोमैटिक अलर्ट सिस्टम जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल की जानी चाहिए, ताकि रिकवरी रेट को बढ़ाया जा सके।

फिलहाल, आम नागरिक अपनी गाढ़ी कमाई से महंगे स्मार्टफोन तो खरीद रहे हैं, लेकिन चोरी होने के बाद वे स्क्रीन पर सिर्फ एक ‘ब्लिंकिंग डॉट’ देखकर बेबस रह जाते हैं। दिल्ली पुलिस ने इस पर लगाम लगाने के लिए विशेष अभियान तो शुरू किया है, लेकिन तकनीकी कमियों से रिकवरी दर काफी कम है।

Gaurav Malhotra

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories