Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में मानसून के आने से पहले ही कुदरत ने रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया है। सोलन जिले में शुक्रवार को अचानक हुई मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। मात्र बीस मिनट की तेज बारिश से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की तरफ भागे।
मौसम विभाग के अनुसार सोलन में पिछले चौबीस घंटों के दौरान करीब अस्सी मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान शुक्रवार की शाम को महज बीस मिनट में ही लगभग तीस मिलीमीटर पानी बरस गया। इस अचानक आई आसमानी आफत के कारण जिले के मैदानी और पहाड़ी इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं।
नौणी-मझगांव पंचायत के गांवों में भारी नुकसान
इस तेज बारिश का सबसे खतरनाक असर सोलन की नौणी-मझगांव पंचायत के अंतर्गत आने वाले रंगाह और अणु गांवों में देखने को मिला है। इन दोनों गांवों के ऊपरी हिस्सों से आने वाले बरसाती नाले अचानक उफान पर आ गए। मलबे के भारी प्रवाह ने देखते ही देखते रिहायशी इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।
रंगाह गांव में स्थिति बेहद गंभीर हो गई जब स्थानीय निवासी सुमन ठाकुर के घर के भीतर भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा घुस गया। इसी तरह गांव के एक अन्य निवासी आशु के मकान की छत तक मलबा पहुंच गया। गनीमत यह रही कि इस आपदा में किसी भी तरह के जानी नुकसान की खबर नहीं है।
अचानक आए मलबे के कारण किसानों को भी भारी आर्थिक चोट पहुंची है। गांव की महिला किसान सुमित्रा के खेतों में पानी भरने से टमाटर और बीन की नकदी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई हैं। इससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है और वे अब प्रशासन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
सड़कें बंद और राहत कार्य जारी
अणु गांव में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं। मुख्य संपर्क मार्ग पर भारी मात्रा में पत्थर और मिट्टी जमा होने से गाड़ियों की आवाजाही ठप हो गई है। स्थानीय प्रशासन ने सड़क को दोबारा चालू करने के लिए तुरंत जेसीबी मशीनों को काम पर लगाया है, जो युद्ध स्तर पर मलबा हटा रही हैं।
डॉ. परमार यूनिवर्सिटी नौणी के पर्यावरण विभाग के एचओडी डॉ. सतीश भारद्वाज ने इस प्राकृतिक घटना की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि चौबीस घंटों में कुल सतहत्तर दशमलव सात एमएम बारिश हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि शुक्रवार को सोलन का न्यूनतम तापमान गिरकर सोलह डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
पहाड़ी पर लगी आग बनी तबाही की वजह
नौणी-मझगांव पंचायत की नवनिर्वाचित प्रधान शिवानी ठाकुर ने इस तबाही के पीछे का मुख्य कारण साझा किया है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले ही रंगाह और अणु गांव के ऊपर मौजूद पहाड़ी के जंगलों में भयंकर आग लगी थी। इस वजह से वहां की मिट्टी कमजोर हो गई थी।
तेज बारिश के कारण चीड़ की सूखी पत्तियां, जली हुई लकड़ियां और मिट्टी बहकर नीचे आ गईं। इस मलबे ने रास्ते में बनी पुलिया को पूरी तरह बंद कर दिया। पुलिया ब्लॉक होने से सारा पानी और कीचड़ सीधे लोगों के घरों की तरफ मुड़ गया, जिससे यह भयानक मंजर पैदा हुआ।
पंचायत प्रधान ने जिला प्रशासन से मांग की है कि मानसून के पूरी तरह सक्रिय होने से पहले बंद पड़ी सभी पुलियाओं को तुरंत साफ करवाया जाए। इसके साथ ही उन्होंने सरकार से प्रभावित ग्रामीणों को फसलों और मकानों के नुकसान का उचित मुआवजा जल्द से जल्द प्रदान करने की अपील की है।
Author: Sunita Gupta


