Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की रहने वाली होनहार छात्रा विपाशा श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। विपाशा ने बेंगलुरु स्थित देश के सबसे प्रतिष्ठित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइंसेज के पीएचडी प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान हासिल किया है।
राष्ट्रीय महत्व के संस्थान में मिलेगा फेलोशिप का लाभ
विपाशा को संस्थान में मानसिक स्वास्थ्य एवं पुनर्वास विषय में शोध करने के लिए प्रतिष्ठित इंस्टीट्यूट फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। भारत सरकार से राष्ट्रीय महत्व का दर्जा प्राप्त निमहैंस देश में मानसिक स्वास्थ्य और न्यूरोसाइंसेज के क्षेत्र में शोध और इलाज का सबसे बड़ा और अग्रणी केंद्र माना जाता है।
विपाशा की इस शानदार सफलता ने उनके परिवार के साथ-साथ पूरे हिमाचल को गौरवान्वित किया है। इस कठिन परीक्षा को पास करने के लिए देश भर से हजारों मेधावी छात्र हिस्सा लेते हैं। इस अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा में सर्वोच्च रैंक हासिल करना उनकी कड़ी मेहनत और असाधारण प्रतिभा को दर्शाता है।
चंडीगढ़ मेडिकल कॉलेज से पहले भी किया है टॉप
विपाशा की शुरुआती पढ़ाई शिमला के दयानंद पब्लिक स्कूल और लॉरेटो कॉन्वेंट स्कूल से पूरी हुई है। इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय से मनोविज्ञान विषय में बीए ऑनर्स किया। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय से क्लिनिकल साइकोलॉजी में अपनी मास्टर्स डिग्री उच्च अंकों के साथ पूरी की है।
उन्होंने हाल ही में चंडीगढ़ के गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मनोचिकित्सा विभाग से क्लिनिकल साइकोलॉजी में एम.फिल. की डिग्री प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की है। खास बात यह है कि चंडीगढ़ के इस विख्यात पाठ्यक्रम की अखिल भारतीय प्रवेश परीक्षा में भी विपाशा ने सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया था।
वंचित वर्गों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए करेंगी काम
विपाशा के पिता प्रो. अजय श्रीवास्तव हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से सेवानिवृत्त हैं। उनकी माता मृदुला श्रीवास्तव सतलुज जल विद्युत निगम में डिप्टी जनरल मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हुई हैं। बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता से पूरे परिवार और शुभचिंतकों के बीच बेहद खुशी का माहौल बना हुआ है।
विपाशा रिहैबिलिटेशन काउंसिल ऑफ इंडिया से मान्यता प्राप्त पेशेवर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट हैं। वह वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रही हैं। उनका बचपन से ही यह सपना रहा है कि वे समाज के कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों के मानसिक स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए काम करें।
Reported By: Sunita Gupta


