लद्दाख के इन प्राचीन मठों में छिपा है ‘रहस्यमयी’ इतिहास, सुंदरता देख दुनिया हो जाती है दीवानी!

Travel News: भारत अपनी अद्भुत सांस्कृतिक धरोहर के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। आजकल युवाओं में लद्दाख की राजधानी लेह में रोड ट्रिप और बाइक राइडिंग का क्रेज बहुत तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन बेहद कम लोग जानते हैं कि बर्फीले पहाड़ों के अलावा लेह प्राचीन बौद्ध मठों का भी सबसे बड़ा केंद्र है।

समुद्र तल से करीब 11,000 फीट की ऊंचाई पर बसे लेह में सदियों पुराने ऐतिहासिक मठ मौजूद हैं। ये मठ लद्दाख की प्राचीन बौद्ध संस्कृति और कला को आज भी अपने भीतर संजोए हुए हैं। यहां के हेमिस, थिकसे, डिस्कीट और स्पितुक जैसे मठों का अपना एक बेहद गौरवशाली और अनोखा इतिहास रहा है।

थिकसे मठ: 12 मंजिला खूबसूरत इमारत

लेह मुख्य शहर से करीब 19 किलोमीटर की दूरी पर स्थित थिकसे मठ एक भव्य 12 मंजिला इमारत है। यहां आने वाले पर्यटकों को बेहद शांत वातावरण और खूबसूरत प्राकृतिक नजारे देखने को मिलते हैं। इस मठ में प्राचीन बौद्ध मूर्तियां और सूती कपड़े पर की जाने वाली पारंपरिक ‘थांगका’ पेंटिंग मुख्य आकर्षण हैं।

हेमिस मठ: सबसे बड़ा हिमालयी केंद्र

लेह से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित हेमिस मठ लद्दाख का सबसे बड़ा और समृद्ध हिमालयी मठ माना जाता है। इस ऐतिहासिक मठ की दीवारों पर खास चक्र बने हुए हैं, जो मनुष्य के जीवन चक्र को दर्शाते हैं। वर्तमान समय में इस बेहद प्रतिष्ठित मठ की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी द्रुकपा संप्रदाय संभाल रहा है।

नुब्रा वैली की खूबसूरत वादियों में स्थित डिस्किट मठ तिब्बती संस्कृति का एक बेजोड़ नमूना पेश करता है। 14वीं शताब्दी में बना यह प्रसिद्ध मठ लेह से लगभग 120 किलोमीटर की दूरी पर श्योक नदी के पास एक ऊंची पहाड़ी की चोटी पर स्थित है। यहां से घाटी का नजारा अद्भुत दिखाई देता है।

मई से सितंबर के बीच बनाएं घूमने का प्लान

अगर आप लेह के इन खूबसूरत और शांत मठों का दीदार करना चाहते हैं, तो मई से सितंबर के बीच का समय सबसे उत्तम माना जाता है। इस दौरान लद्दाख का मौसम बेहद सुहावना रहता है और सभी रास्ते भी खुले रहते हैं। सितंबर के बाद यहां भारी बर्फबारी शुरू हो जाती है जिससे सफर काफी मुश्किल हो जाता है।

Author: Rigzin Namgyal

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