बच्चों की सुरक्षा के लिए 7 जादुई नियम: जो पुलिस ट्रेनिंग एक्सपर्ट ने बताए, हर पेरेंट्स को पता होने चाहिए

New Delhi: आज के दौर में बच्चों की सुरक्षा माता-पिता के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है। बाहर की दुनिया में कब और क्या हो जाए, इसका अंदाजा लगाना बेहद मुश्किल है। पुलिस ट्रेनिंग सेंटर के विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों को सिर्फ अच्छे संस्कार ही नहीं, बल्कि सुरक्षा के कुछ ‘गोल्डन रूल्स’ बचपन से ही सिखाने चाहिए।

बच्चों को सबसे पहले घर में अकेले रहने के दौरान सतर्क रहना सिखाएं। अगर दरवाजे पर कोई अनजान व्यक्ति आए और पूछे कि घर पर कौन है, तो बच्चे को हमेशा कहना चाहिए कि मम्मी-पापा घर पर हैं। उन्हें सिखाएं कि कभी भी अनजान व्यक्ति से लिफ्ट न लें और उनसे हमेशा उचित दूरी बनाए रखें।

कई बार अपराधी बच्चों को चॉकलेट, खिलौनों या खाने का लालच देकर फंसाने की कोशिश करते हैं। उन्हें सिखाएं कि ऐसा कोई भी तोहफा स्वीकार न करें। अगर कोई उन्हें कहीं ले जाने की कोशिश करे, तो जोर से कहें कि उनके मम्मी-पापा पास में ही हैं। साथ ही, बच्चों को निजी जानकारी किसी से साझा न करने दें।

खतरे की स्थिति में कैसे करें बचाव

बच्चों को यह समझाना बहुत जरूरी है कि अगर कोई उनसे कहे कि ‘यह बात मम्मी-पापा को मत बताना’, तो यह खतरे का बड़ा संकेत है। उन्हें हर बात खुलकर बताने के लिए प्रेरित करें। अगर बच्चा कभी भीड़भाड़ वाली जगह में खो जाए, तो घबराने के बजाय किसी पुलिसकर्मी, सुरक्षा गार्ड या किसी महिला से तुरंत मदद मांगना सिखाएं।

किसी भी विषम परिस्थिति या खतरे का एहसास होने पर बच्चे को अपनी पूरी ताकत से चिल्लाना चाहिए। उन्हें सिखाएं कि अगर कोई उन्हें जबरदस्ती पकड़ने की कोशिश करे, तो वे जोर से आवाज लगाएं और तुरंत भीड़ या किसी सुरक्षित जगह की ओर भागें। यह आत्मविश्वास उन्हें हर बड़े खतरे से बचाने में काफी मददगार साबित होता है।

सुरक्षा से जुड़ी ये आदतें बच्चों के दिनचर्या का हिस्सा होनी चाहिए। माता-पिता को चाहिए कि वे इन स्थितियों का अभ्यास घर पर ही रोलप्ले के जरिए करें। जब बच्चा सही और गलत में फर्क करना सीख जाएगा, तब वह न केवल अपनी रक्षा कर पाएगा, बल्कि मुश्किल समय में सही निर्णय लेने में भी सक्षम होगा।

Author: Karuna Sen

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