गर्भवती महिलाएं भीषण गर्मी में भूलकर भी न करें ये गलतियां, पेट में पल रहे बच्चे की जान को हो सकता है बड़ा खतरा

Delhi News: भारत में बढ़ती भीषण गर्मी गर्भवती महिलाओं की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। अत्यधिक तापमान में लंबे समय तक रहने से मां और होने वाले बच्चे दोनों पर बुरा असर पड़ता है। गर्भावस्था के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रित करना काफी मुश्किल होता है।

नई दिल्ली के एलांटिस हेल्थकेयर के चेयरमैन डॉ. मनन गुप्ता ने इस विषय पर जरूरी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि बहुत ज्यादा पसीना आने और पर्याप्त लिक्विड न लेने से महिलाएं डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाती हैं। इससे प्लेसेंटा तक खून का बहाव काफी कम हो जाता है।

गर्भ में पल रहे शिशु तक नहीं पहुंच पाती ऑक्सीजन

खून का बहाव कम होने से गर्भस्थ शिशु तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। इसके साथ ही जरूरी पोषक तत्वों की कमी भी हो जाती है। चिकित्सा शोध के अनुसार अत्यधिक गर्मी का सामना करने वाली महिलाओं में समय से पहले डिलीवरी का खतरा काफी बढ़ जाता है।

ऐसी स्थिति में बच्चे का जन्म तय समय यानी 37 सप्ताह से पहले हो सकता है। इसके अलावा नवजात शिशु का वजन बेहद कम होने की आशंका रहती है। हीट स्ट्रेस के कारण महिलाओं के यूट्रस में अचानक तीव्र कॉन्ट्रैक्शन शुरू हो सकता है, जो समय से पहले प्रसव का कारण बनता है।

भीषण गर्मी के कारण गर्भवती मां को लगातार चक्कर आने और सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। इसके साथ ही शरीर में भयंकर कमजोरी, ब्लड प्रेशर का कम होना और इलेक्ट्रोलाइट इम्बैलेंस जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। लू के थपेड़े गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करते हैं।

जिन महिलाओं को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या दिल की बीमारी है, उनकी मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में बाहर का अत्यधिक तापमान उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। इसलिए डॉक्टरों ने हीट वेव के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

गर्मी के मौसम में हाइड्रेटेड रहने के आसान उपाय

  • 1. गर्भवती महिलाओं को प्यास न लगने पर भी नियमित अंतराल पर पर्याप्त पानी पीते रहना चाहिए।
  • 2. शरीर में जरूरी लिक्विड की मात्रा बनाए रखने के लिए रोजाना ताजे नारियल पानी का सेवन करें।
  • 3. इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को तुरंत ठीक करने के लिए डॉक्टर की सलाह पर ओआरएस घोल का प्रयोग करें।
  • 4. दिन के सबसे गर्म समय यानी सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर जाना पूरी तरह बंद रखें।

गर्मी के इस मौसम में महिलाओं को हमेशा ढीले-ढाले और हल्के रंग के सूती कपड़े ही पहनने चाहिए। उन्हें हमेशा ठंडी और हवादार जगहों पर समय बिताना चाहिए। अपने दैनिक आहार में पानी की अधिक मात्रा वाले फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा शामिल करना बेहद फायदेमंद होता है।

गर्भवती महिलाओं को शरीर में दिखने वाले कुछ खतरनाक लक्षणों पर हमेशा लगातार नजर रखनी चाहिए। इसमें तेज सिरदर्द, अचानक बुखार आना, गर्भ में शिशु की हलचल कम होना या लगातार दर्द शामिल हैं। ऐसे कोई भी असामान्य लक्षण दिखने पर बिना देरी किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

डॉक्टरों के अनुसार बाहर तेज गर्मी होने के बावजूद उचित सावधानी रखकर इस खतरे को टाला जा सकता है। ज्यादातर मामलों में सावधानी बरतने से प्रेगनेंसी बिल्कुल सामान्य और सुरक्षित रहती है। सही खानपान और सुरक्षित जीवनशैली अपनाकर मां और बच्चे दोनों को पूरी तरह स्वस्थ रखा जा सकता है।

Author: Asha Thakur

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