ग्लोबल मंच पर पुतिन ने माना भारत का लोहा, ब्रिक्स और जी-7 के आर्थिक आंकड़ों से दुनिया को चौंकाया, जेलेंस्की को दिया झटका

Russia News: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत को वैश्विक आईटी उद्योग का एक असली दिग्गज करार दिया है। शुक्रवार को सेंट पीटर्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच 2026 के मुख्य सत्र में उन्होंने भारत की तकनीकी ताकत की जमकर तारीफ की। पुतिन ने कहा कि भारत सॉफ्टवेयर के वैश्विक बाजार में बहुत बड़ी हिस्सेदारी रखता है।

पुतिन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत को रूस का एक बेहद महत्वपूर्ण और भरोसेमंद साझेदार बताया। उन्होंने कहा कि भारत आईटी के क्षेत्र में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। भारतीय डेवलपर्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों की काबिलियत का लोहा आज पूरी दुनिया बहुत ही अच्छी तरह से मान रही है।

ब्रिक्स देशों ने जी-7 को आर्थिक मोर्चे पर पछाड़ा

आर्थिक मंच को संबोधित करते हुए पुतिन ने वैश्विक जीडीपी के कुछ बेहद चौंकाने वाले आंकड़े दुनिया के सामने रखे। उन्होंने दावा किया कि विश्व की कुल जीडीपी में अब ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी बढ़कर पूरे 40 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। इसके मुकाबले तथाकथित शक्तिशाली जी-7 देशों की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत से भी कम रह गई है।

रूसी राष्ट्रपति ने साफ कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स देशों का दबदबा और नेतृत्व आने वाले समय में लगातार बढ़ता रहेगा। दुनिया के नए विकास केंद्र अब अपनी विकास यात्रा खुद तय कर रहे हैं। वे किसी भी बाहरी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं हैं और अपने खुद के वैश्विक ब्रांड विकसित कर रहे हैं।

वैश्विक विकास दर में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा

पिछले पांच वर्षों के आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए पुतिन ने बताया कि वैश्विक जीडीपी की कुल वार्षिक वृद्धि का लगभग आधा हिस्सा यानी 49 प्रतिशत अकेले ब्रिक्स देशों से आता है। इसके विपरीत ग्रुप ऑफ सेवन यानी जी-7 देशों का योगदान केवल 18 प्रतिशत ही आंका गया है।

पुतिन ने कहा कि ब्रिक्स ने साल 2020 में ही आर्थिक ताकत के मामले में जी-7 को बहुत पीछे छोड़ दिया था। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के आंकड़े भी इसी सच्चाई की पुष्टि करते हैं। जहां जी-7 की विकास दर महज 1.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, वहीं ब्रिक्स देश चार प्रतिशत से अधिक की रफ्तार से बढ़ रहे हैं।

यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के बातचीत के प्रस्ताव को ठुकराया

इस बड़े आर्थिक मंच पर पुतिन ने यूक्रेन संकट को लेकर भी एक बेहद कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की द्वारा भेजे गए सीधी द्विपक्षीय बैठक के प्रस्ताव को सिरे से ठुकरा दिया। पुतिन ने जेलेंस्की के खुले पत्र की भाषा पर गंभीर आपत्ति जताई।

रूसी राष्ट्रपति ने जेलेंस्की के इस पत्र को पूरी तरह से अशिष्ट और कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि व्यक्तिगत मुलाकातों या गंभीर वार्ताओं के लिए स्थितियां बनाने का यह कोई सही तरीका नहीं है। पुतिन ने स्पष्ट किया कि वर्तमान माहौल में उन्हें इस बैठक का कोई ठोस अर्थ दिखाई नहीं देता।

Author: Pallavi Sharma

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