हिमाचल प्रदेश सरकार का बड़ा फैसला, हिमकेयर योजना में बदले नियम, भोजन और दवाओं समेत 18 खर्च क्लेम से बाहर

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने अपनी लोकप्रिय स्वास्थ्य बीमा योजना ‘हिमकेयर’ के नियमों में बड़ा फेरबदल किया है। नए आदेशों के तहत अब अस्पताल क्लेम के तहत अंधाधुंध पैसा वसूल नहीं कर सकेंगे। सरकार ने इलाज के दौरान होने वाले कई खर्चों को इस योजना की प्रतिपूर्ति सूची से बाहर कर दिया है।

चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक अब सरकारी अस्पतालों को मिलने वाला क्लेम वास्तविक व्यय या तय पैकेज दर में से जो भी कम होगा, उसी आधार पर मिलेगा। शासन ने इस फैसले को तत्काल प्रभाव से लागू किया है।

भोजन और महत्वपूर्ण जांचों सहित 18 बड़ी मदें बाहर

इस नई अधिसूचना के लागू होने से स्वास्थ्य विभाग ने क्लेम के दायरे को काफी सीमित कर दिया है। अब अस्पताल में भर्ती मरीजों के पंजीकरण शुल्क, जनरल वार्ड बेड चार्ज, नर्सिंग और बोर्डिंग फीस को बाहर किया गया है। इसके अलावा सर्जनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की फीस भी अब क्लेम में शामिल नहीं होगी।

सरकार ने ऑपरेशन थियेटर चार्ज, ऑक्सीजन, एनेस्थीसिया, खून चढ़ाने और सर्जिकल उपकरणों की लागत को भी बाहर कर दिया है। सबसे बड़ा झटका दवाओं, एक्स-रे, एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य पैथोलॉजी जांचों के रूप में लगा है। अब मरीज के भोजन और इलाज से जुड़ी अन्य उपभोज्य सामग्रियों पर प्रतिपूर्ति नहीं मिलेगी।

राज्य सरकार का तर्क है कि इन सभी मदों पर होने वाला नियमित खर्च पहले से ही सरकारी बजट के माध्यम से पूरा किया जाता है। इसलिए अस्पतालों को इनका दोबारा अलग से क्लेम नहीं दिया जाना चाहिए। अब स्वास्थ्य संस्थानों को क्लेम के लिए वास्तविक बिल और जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे।

खजाने पर वित्तीय बोझ कम करने और पारदर्शिता की कोशिश

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस कड़े कदम से हिमकेयर योजना पर लगातार बढ़ रहे भारी वित्तीय बोझ को नियंत्रित किया जा सकेगा। इससे क्लेम भुगतान की पूरी प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता आएगी। यह नया नियम अस्पतालों द्वारा भेजे जाने वाले फर्जी और बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए दावों को रोकेगा।

हालांकि स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि दवाओं और जरूरी जांचों को बाहर करने से सरकारी अस्पतालों पर वित्तीय दबाव बहुत बढ़ जाएगा। अस्पतालों को इन मूलभूत सेवाओं की व्यवस्था अपने सीमित संसाधनों से करनी होगी। स्वास्थ्य विभाग की सचिव एम सुधा देवी के हस्ताक्षर से यह बड़ा आदेश जारी हुआ है।

Author: Asha Thakur

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