Shimla News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने नगर निगम चुनावों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। शहरी विकास विभाग की अधिसूचना के अनुसार, मेयर का कार्यकाल अब पांच साल रहेगा। साथ ही नगर निगम वार्डों में आरक्षण की अवधि भी अढ़ाई साल से बढ़ाकर पूरे पांच साल कर दी गई है।
सरकार ने यह संशोधन राज्य चुनाव आयोग से परामर्श के बाद किया है। अधिसूचना में हिमाचल प्रदेश नगर निगम चुनाव नियम, 2012 में बदलाव का जिक्र है। इसके लिए हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 31 के तहत मिले अधिकारों का इस्तेमाल किया गया है।
अब पांच साल तक नहीं बदलेगा वार्ड आरक्षण
अधिसूचना के अनुसार, नगर निगम चुनाव नियम, 2012 के नियम-12 में संशोधन किया गया है। पहले वार्डों का आरक्षण दो वर्ष छह माह के लिए तय होता था। इसके बाद आरक्षण बदलने की व्यवस्था थी। अब यह अवधि बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है।
इस बदलाव के बाद नगर निगमों में आरक्षित वार्डों की स्थिति पूरे कार्यकाल तक बनी रहेगी। इससे बार-बार आरक्षण बदलने की प्रक्रिया खत्म होगी। उम्मीदवारों को पहले से तैयारी करने में मदद मिलेगी। मतदाताओं को भी साफ रहेगा कि उनका वार्ड आरक्षित है या अनारक्षित।
जनरल शब्द हटाकर अनारक्षित जोड़ा गया
नए संशोधन में एक और भाषाई बदलाव किया गया है। नियम में इस्तेमाल जनरल शब्द को हटाकर अनारक्षित शब्द जोड़ा गया है। चुनावी भाषा में यह बदलाव अहम माना जा रहा है। इससे आरक्षित और अनारक्षित वार्डों की स्थिति ज्यादा स्पष्ट तरीके से दर्ज होगी।
सरकार की अधिसूचना ई-गजट में प्रकाशित होने की तारीख से लागू मानी जाएगी। यानी 29 मई 2026 से नगर निगम चुनावों में आरक्षण की नई व्यवस्था प्रभावी हो गई है। अब आगामी चुनावी प्रक्रिया इसी संशोधित नियम के आधार पर आगे बढ़ेगी।
नगर निगम चुनावों में आरक्षण व्यवस्था का सीधा असर टिकट दावेदारों, राजनीतिक दलों और स्थानीय मतदाताओं पर पड़ता है। पहले अढ़ाई साल बाद आरक्षण बदलने से कई जगह राजनीतिक समीकरण बदल जाते थे। अब पांच साल की स्थिरता से चुनावी रणनीति लंबे समय के हिसाब से बनेगी।
शहरी विकास विभाग के इस फैसले से प्रशासनिक प्रक्रिया भी आसान होने की उम्मीद है। अधिकारियों को बार-बार आरक्षण रोस्टर बदलने की जटिलता से राहत मिलेगी। नगर निगम क्षेत्रों में चुनावी तैयारी, वार्ड प्रबंधन और मतदाता जागरूकता कार्यक्रम भी ज्यादा व्यवस्थित तरीके से चल सकेंगे।
यह संशोधन हिमाचल के शहरी निकायों की चुनावी व्यवस्था में अहम बदलाव माना जा रहा है। मेयर के कार्यकाल और वार्ड आरक्षण की अवधि पांच साल होने से नगर निगमों में नेतृत्व और प्रतिनिधित्व को लेकर लंबे समय तक स्पष्टता रहेगी। इसका असर आगामी चुनावों में दिख सकता है।
Author: Sunita Gupta


