1500 नौकरियों के लिए आवेदन, फिर भी नहीं मिला एक इंटरव्यू; H-1B प्रोफेशनल की कहानी ने छेड़ी नई बहस

USA News: अमेरिका में नौकरी और वीजा नीतियों को लेकर चल रही बहस के बीच एक H-1B वीजा धारक की कहानी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। डेटा इंजीनियर के रूप में काम कर रहे इस पेशेवर ने दावा किया कि 1500 से अधिक नौकरियों के लिए आवेदन करने के बावजूद उसे एक भी इंटरव्यू कॉल नहीं मिली।

रेडिट पर साझा की गई पोस्ट ने अमेरिकी रोजगार बाजार की मौजूदा स्थिति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। पोस्ट के अनुसार संबंधित पेशेवर कोई नया उम्मीदवार नहीं है। वह तीन साल से अधिक समय तक ओहायो में डेटा इंजीनियर के रूप में काम कर चुका है और उसके पास तकनीकी क्षेत्र का व्यावहारिक अनुभव भी मौजूद है।

वीजा नवीनीकरण रुका, शुरू हुई नई चुनौती

पोस्ट में बताया गया कि उसकी कंपनी ने H-1B वीजा नवीनीकरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे नई नौकरी की तलाश शुरू करनी पड़ी। उसने देशभर में उपलब्ध अवसरों के लिए लगातार आवेदन किए, लेकिन लंबे समय तक किसी भी कंपनी से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली।

पेशेवर ने लिखा कि उसके पास डेटा पाइपलाइन डेवलपमेंट, क्लाउड टेक्नोलॉजी, ईटीएल वर्कफ्लो और प्रोडक्शन सिस्टम्स पर काम करने का अनुभव है। इसके बावजूद उसे समझ नहीं आ रहा कि समस्या बाजार की स्थिति है, वीजा स्पॉन्सरशिप है या फिर किसी अन्य कारण से कंपनियां जवाब नहीं दे रही हैं।

सोशल मीडिया पर आई प्रतिक्रियाओं की बाढ़

पोस्ट वायरल होने के बाद हजारों लोगों ने अपनी राय साझा की। कुछ यूजर्स ने उसके संघर्ष के प्रति सहानुभूति जताई और कहा कि अमेरिकी टेक सेक्टर इस समय कठिन दौर से गुजर रहा है। वहीं कई लोगों ने रोजगार बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को इस स्थिति की प्रमुख वजह बताया।

कई प्रतिक्रियाएं आलोचनात्मक भी रहीं। कुछ यूजर्स ने कहा कि यदि 1500 आवेदन के बाद भी इंटरव्यू कॉल नहीं आई तो बाजार में मांग और कौशल के बीच अंतर हो सकता है। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया कि वर्तमान समय में H-1B वीजा स्पॉन्सरशिप देने वाली कंपनियों की संख्या पहले की तुलना में कम हो गई है।

डेटा इंजीनियरिंग क्षेत्र में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

कई यूजर्स ने टिप्पणी की कि डेटा इंजीनियरिंग और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा काफी बढ़ चुकी है। बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय छात्र और पेशेवर इसी क्षेत्र में अवसर तलाश रहे हैं। इसके कारण सीमित पदों के लिए उम्मीदवारों के बीच मुकाबला पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है।

यह मामला अमेरिका में H-1B वीजा कार्यक्रम की स्थिति पर भी चर्चा का केंद्र बन गया है। हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रशासन ने H-1B और OPT कार्यक्रमों से जुड़े कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। इसके बाद कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती को लेकर अधिक सतर्क दिखाई दे रही हैं।

टेक सेक्टर में भर्ती की रफ्तार धीमी

तकनीकी उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के बाद भर्ती में जो तेजी देखी गई थी, वह अब काफी कम हो चुकी है। कई बड़ी टेक कंपनियों ने लागत घटाने के लिए कर्मचारियों की संख्या कम की है। इसके साथ ही नई नियुक्तियों पर भी नियंत्रण रखा जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार वीजा स्पॉन्सरशिप की जरूरत रखने वाले उम्मीदवारों को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। कई कंपनियां अब ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता देती हैं जिन्हें अतिरिक्त कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया की आवश्यकता नहीं होती। इससे विदेशी पेशेवरों के लिए प्रतिस्पर्धा और कठिन हो गई है।

रोजगार विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मौजूदा बाजार में केवल तकनीकी कौशल पर्याप्त नहीं है। नेटवर्किंग, स्थानीय अनुभव, विशेष विशेषज्ञता और नई तकनीकों की समझ भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई विदेशी पेशेवरों को अब पहले की तुलना में अधिक समय तक नौकरी की तलाश करनी पड़ रही है।

वायरल पोस्ट ने अमेरिका में काम कर रहे हजारों विदेशी पेशेवरों की चिंताओं को सामने ला दिया है। खासकर भारतीय मूल के तकनीकी विशेषज्ञों के बीच यह विषय चर्चा में है, क्योंकि H-1B वीजा कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभ भारतीय पेशेवरों को ही मिलता रहा है।

Author: Pallavi Sharma

Hot this week

Related Articles

Popular Categories