Business News: ब्रिटिश सरकार ने भारत के दिग्गज अरबपति उद्यमी सुनील भारती मित्तल की टेलीकॉम कंपनी ‘बीटी’ (BT) में हिस्सेदारी बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। ब्रिटेन प्रशासन का मानना है कि इस महत्वपूर्ण कंपनी पर विदेशी प्रभाव बढ़ने से उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभु नियंत्रण प्रभावित हो सकता है।
दरअसल बीटी का नेटवर्क डिवीजन ‘ओपनरीच’ ब्रिटेन के डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र में बेहद अहम भूमिका निभाता है। यह नेटवर्क देश के 22 मिलियन से अधिक घरों को फाइबर ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करता है। इसी वजह से ब्रिटिश सरकार इन रणनीतिक संपत्तियों को पूरी तरह अपने घरेलू नियंत्रण में रखना चाहती है।
भारती समूह है बीटी का सबसे बड़ा निवेशक
भारती समूह ने साल 2024 में एल्टिस के संस्थापक पैट्रिक ड्राही से 24.5 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर बीटी में बड़ा निवेश किया था। इस सौदे के बाद भारतीय समूह इस टेलीकॉम कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक बन गया था। भारती के निवेश के बाद से बीटी के शेयरों में 55 प्रतिशत की भारी तेजी आई है।
राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत होगी कड़ी जांच
ब्रिटेन के नियमों के मुताबिक यदि भारती समूह बीटी में अपनी हिस्सेदारी को 25 प्रतिशत से अधिक करने का प्रयास करता है, तो यह सौदा स्वचालित रूप से वहां के ‘राष्ट्रीय सुरक्षा और निवेश अधिनियम’ के दायरे में आ जाएगा। यह सख्त कानून ब्रिटिश अधिकारियों को देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे से जुड़े सौदों को रोकने की शक्ति देता है।
ब्रिटिश सरकार ने भविष्य की किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए अपनी सख्त स्थिति को पहले ही साफ कर दिया है। वर्तमान में सुनील मित्तल ने बीटी की मुख्य कार्यकारी एलिसन किर्कबी के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध बनाए हुए हैं और कंपनी के बोर्ड में भारती समूह के पास दो महत्वपूर्ण सीटें भी सुरक्षित हैं।
Author: Rajesh Kumar


