Business News: देश के सबसे बड़े निजी ऋणदाता एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आज अचानक दो फीसदी से ज्यादा की भारी गिरावट दर्ज की गई। एक सनसनीखेज मीडिया रिपोर्ट के बाद निवेशकों ने बाजार में बिकवाली तेज कर दी। इस रिपोर्ट में बैंक के भीतर एक बेहद गोपनीय सतर्कता जांच का बड़ा दावा किया गया है।
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खोजी रिपोर्ट के अनुसार बैंक प्रबंधन ने एक सरकारी कंपनी को किए गए 45 करोड़ रुपये के संदिग्ध ब्याज भुगतान की आंतरिक सतर्कता जांच शुरू की थी। यह पूरी जांच पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के 18 मार्च को पद छोड़ने से ठीक पहले शुरू की गई थी।
ऑडिट कमिटी ने दिया जांच का कड़ा आदेश
एचडीएफसी बैंक के बोर्ड की शक्तिशाली ऑडिट कमिटी ने बीती 12 मार्च को इस मामले की उच्च स्तरीय जांच का आदेश दिया था। यह सख्त निर्देश बैंक के मार्केटिंग विभाग के एक आंतरिक ऑडिट के बाद जारी हुआ था। ऑडिट में विभाग के कामकाज को बेहद असंतोषजनक पाया गया था।
आंतरिक ऑडिट टीम ने विभाग के कई संदिग्ध लेन-देन पर गंभीर सवालिया निशान खड़े किए थे। रिपोर्ट के गंभीर आरोपों के मुताबिक यह विवादित भुगतान महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) की जमा राशि पर मिले “विभेदक ब्याज” के निपटारे के रूप में तय किया गया था।
मार्केटिंग बजट से चुकाया गया जमा का ब्याज
नियमों के मुताबिक ब्याज का यह पैसा सीधे एमएसआरडीसी के खाते में जमा होना चाहिए था। मगर बैंक के मार्केटिंग विभाग ने इस रकम को कथित तौर पर चार स्थानीय वेंडरों के माध्यम से घुमाया। इसके बाद इसे सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान में दिए गए योगदान के रूप में दर्ज किया गया।
इस हेरफेर से जुड़े बैंक के कई आंतरिक रिकॉर्ड्स सामने आए हैं। इन दस्तावेजों से कथित तौर पर यह साफ संकेत मिला है कि बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शशिधर जगदीशन उन महत्वपूर्ण चर्चाओं के दौरान बैठक में खुद मौजूद थे।
सीईओ शशिधर जगदीशन पर उठे गंभीर सवाल
पूरी डील के दौरान एमएसआरडीसी को ज्यादा भुगतान करने पर बैंक प्रबंधन के बीच “मौखिक रूप से” सहमति बनी थी। जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट में दावा है कि सीईओ जगदीशन ने उस विशेष कॉल में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था।
यह कॉल मुख्य रूप से इसी बात पर विचार करने के लिए बुलाई गई थी कि बैंक एमएसआरडीसी को भारी मुआवजा किस तरह दे सकता है। सीईओ जगदीशन मार्केटिंग बजट के जरिए ब्याज का अंतर चुकाने के इस एक-बारगी शॉर्टकट इंतजाम से जुड़े अंतिम फैसले का मुख्य हिस्सा थे।
Author: Rajesh Kumar

