Himachal Politics: क्या मुश्किल में है सुक्खू सरकार? आचार संहिता उल्लंघन के बड़े आरोपों के बाद राजभवन पहुंची भाजपा

Shimla News: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। प्रदेश भाजपा ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पर चुनावी आचार संहिता के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं ने इस शिकायत को लेकर सीधे राजभवन का दरवाजा खटखटाया है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष राजीव बिंदल के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर सुक्खू सरकार के खिलाफ तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि सत्ता पक्ष चुनाव जीतने के लिए सरकारी मशीनरी का खुला दुरुपयोग कर रहा है।

राजभवन पहुंचे भाजपा नेताओं ने लगाए गंभीर आरोप

राज्यपाल को दिए गए इस ज्ञापन में भाजपा ने कहा कि कांग्रेस सरकार लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है। चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनावों को प्रभावित करने के लिए लगातार नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं। चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद इस तरह के बदलाव संविधान की आत्मा के खिलाफ हैं।

पार्टी ने याचिका में स्पष्ट कहा है कि चुने हुए प्रतिनिधियों को समय पर अधिकार न देना और गजट नोटिफिकेशन में जानबूझकर देरी करना गलत है। सरकार अप्रत्यक्ष रूप से नौकरशाही का नियंत्रण बनाए रखना चाहती है। भाजपा के अनुसार यह कदम भारतीय संविधान के भाग IX-A की भावनाओं का सीधा उल्लंघन है।

आचार संहिता के बीच हुई कैबिनेट बैठक पर उठे सवाल

भाजपा ने अपनी शिकायत में 22 मई 2026 को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया है। विपक्ष का कहना है कि आचार संहिता लागू होने के बाद भी ऐसी बैठक करना और उसमें लोक-लुभावन फैसले लेना चुनावी निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

इस कैबिनेट बैठक में सुक्खू सरकार ने जनता से जुड़े कई बड़े फैसले लिए थे। सरकार ने इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना के नियमों को बदला। इसके तहत 2 लाख रुपये से कम सालाना आय वाली महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये देने की मंजूरी दी गई।

इसके अलावा विभिन्न सरकारी विभागों में 2215 पदों को भरने और सीबीएसई स्कूलों में 1500 शिक्षकों की भर्ती को मंजूरी दी गई। कॉलेज प्रोफेसरों की रिटायरमेंट उम्र भी 62 से बढ़ाकर 63 वर्ष कर दी गई। पीडब्ल्यूडी के मल्टी टास्क वर्करों का मानदेय 5500 से बढ़ाकर 6000 रुपये किया गया।

साथ ही सिलाई अध्यापिकाओं के वेतन में 1000 रुपये की बढ़ोतरी की गई। हिम चंडीगढ़ परियोजना के लिए 8000 बीघा भूमि देने और फिशिंग रॉयल्टी को 7 फीसदी से घटाकर केवल 1 फीसदी करने का फैसला हुआ। परागपुर में एक नया एसडीएम कार्यालय खोलने को भी मंजूरी मिली।

प्रशासनिक पुनर्गठन के लिए विशेष आयोग का गठन

कैबिनेट बैठक में राज्य की प्रशासनिक इकाइयों के पुनर्गठन के लिए एक नए आयोग को हरी झंडी दी गई। इस आयोग को हिमाचल के सभी 12 जिलों, 81 उपमंडलों, 92 विकास खंडों और 193 तहसील-उपतहसीलों की मौजूदा संरचना की समीक्षा करने का पूरा अधिकार सौंप दिया गया है।

भाजपा ने दावा किया कि ये फैसले मतदाताओं, कर्मचारियों, महिलाओं और युवाओं को प्रभावित करने के लिए जानबूझकर किए गए हैं। वित्तीय लाभ और नई भर्तियों की घोषणाएं आचार संहिता की भावना को ठेस पहुंचाती हैं। विपक्ष के अनुसार, वोटों के फायदे के लिए यह पूरी योजना बनाई गई।

विपक्ष ने राज्यपाल के सामने रखीं ये प्रमुख मांगें

भाजपा ने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए राज्यपाल के समक्ष कई मांगें रखी हैं। पार्टी चाहती है कि आचार संहिता के दौरान हुई कैबिनेट बैठक के फैसलों की तत्काल संवैधानिक जांच हो। इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक इन सभी अधिसूचनाओं पर रोक लगाई जाए।

पार्टी ने नियमों में बदलाव की न्यायिक जांच और सरकारी मशीनरी के उपयोग की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की है। भाजपा ने कहा कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन हो। नगर निकाय और पंचायती राज चुनावों को पूरी तरह पारदर्शी माहौल में कराया जाए।

Author: Sunita Gupta

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