Delhi News: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली से वैश्विक ऊर्जा संकट पर एक बहुत बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। रुबियो ने दावा किया कि वैश्विक रूप से संवेदनशील होर्मुज स्ट्रेट विवाद पर अगले कुछ घंटों में बड़ी खुशखबरी मिल सकती है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का दावा खारिज
अमेरिकी विदेश मंत्री ने साफ कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य एक अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग है। इस महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्ते पर ईरान कभी अपना मालिकाना हक नहीं जता सकता। पिछले 48 घंटों में परमाणु कार्यक्रम और समुद्री मार्ग को लेकर बातचीत में बड़ी प्रगति हुई है। हालांकि तेहरान प्रशासन के साथ अभी अंतिम समझौता होना बाकी है।
दरअसल अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने इस रूट को पूरी तरह ठप कर दिया था। इस कारण एशिया से लेकर यूरोप तक तेल और गैस की सप्लाई रुक गई थी। रुबियो ने भरोसा जताया कि परमाणु कार्यक्रम एक जटिल तकनीकी मुद्दा है, लेकिन इसका शांतिपूर्ण समाधान जल्द निकाल लिया जाएगा।
अमेरिका में भारतीयों की सुरक्षा और व्यापार
बैठक के दौरान मार्को रुबियो ने अमेरिका में भारतीयों पर हो रही नस्लीय टिप्पणियों पर भी दुख जताया। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर देश में कुछ सिरफिरे लोग होते हैं। अमेरिका हमेशा से प्रवासियों का स्वागत करता आया है। ट्रंप सरकार के कार्यकाल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध और मजबूत होंगे।
भारत के लिए सर्वोपरि ‘इंडिया फर्स्ट’ नीति
भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री को साफ शब्दों में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जैसे वॉशिंगटन के लिए ‘अमेरिका फर्स्ट’ है, वैसे ही नई दिल्ली के लिए ‘इंडिया फर्स्ट’ सर्वोपरि है। दोनों देशों को अपने साझा हितों को ध्यान में रखकर आपसी मतभेदों को बहुत समझदारी से सुलझाना होगा।
रूसी तेल पर प्रतिबंध के सवाल पर जयशंकर ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा बाजार को पूरी तरह खुला छोड़ना चाहिए। भारत और अमेरिका दोनों चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें कम रहें। सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार सुनिश्चित करना दोनों देशों के आर्थिक विकास के लिए बेहद जरूरी है।
Author: Pallavi Sharma


