West Bengal News: पश्चिम बंगाल की हाई-प्रोफाइल फलता विधानसभा सीट पर गुरुवार सुबह से ही बेहद कड़ी सुरक्षा के बीच पुनर्मतदान जारी है। सजग मतदाता भारी उत्साह के साथ अपना वोट डालने के लिए मतदान केंद्रों पर लगातार पहुंच रहे हैं।
भारत निर्वाचन आयोग ने इस बार सुरक्षा व्यवस्था को पहले के मुकाबले दोगुना कर दिया है। पिछले दिनों विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के दौरान 29 अप्रैल को यहां मतदान हुआ था। उस समय गंभीर धांधली के आरोपों के बाद आयोग ने दोबारा वोटिंग कराने का बड़ा फैसला लिया था।
दोपहर एक बजे तक रिकॉर्ड 60 फीसदी से ज्यादा मतदान
चुनाव आयोग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक फलता सीट पर दोपहर एक बजे तक 60.43 प्रतिशत बंपर मतदान दर्ज हो चुका है। इससे पहले सुबह 11 बजे तक यहां का मतदान प्रतिशत 43 फीसदी रहा था। जागरूक मतदाता सुबह से ही लाइनों में लगे हैं।
कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह 9 बजे तक वोटिंग का ट्रेंड करीब 20.47% दर्ज किया गया था। मतदान केंद्रों पर महिलाओं की लंबी कतारें दिख रही हैं। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने के लिए आयोग ने चप्पे-चप्पे पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती की है।
ऐन वक्त पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने छोड़ी चुनावी रेस
इस पुनर्मतदान के बीच सबसे हैरान करने वाला वाकया तब सामने आया जब सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के घोषित उम्मीदवार जहांगीर खान ने ऐन वक्त पर मैदान छोड़ दिया। उन्होंने मतदान शुरू होने से महज 48 घंटे पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने का चौंकाने वाला एलान कर दिया था।
जहांगीर खान ने अचानक रेस से हटने की सार्वजनिक घोषणा जरूर की, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर उनका नाम और चुनाव चिह्न बरकरार है। नामांकन वापस लेने की कानूनी तारीख बीत जाने के कारण तकनीकी रूप से उनका नाम मतपत्र से नहीं हटाया जा सका।
ईवीएम मशीन पर नाम रहने से उलझे मतदाता
प्रत्याशी के हटने के बाद मैदान में अब मुख्य मुकाबला भाजपा के देबांग्शु पांडा, माकपा के शंभू नाथ कुर्मी और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच सिमट गया है। जहांगीर खान ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि वह फलता के विकास के लिए पीछे हट रहे हैं।
जहांगीर खान के इस फैसले पर तंज कसते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि टीएमसी प्रत्याशी इसलिए मैदान छोड़कर भाग गया क्योंकि उसे बूथों पर बैठने के लिए कोई पोलिंग एजेंट तक नसीब नहीं हो रहा था। इस बयान से सियासी पारा चढ़ गया है।
हर मतदान केंद्र पर केंद्रीय बलों की पूरी टुकड़ी तैनात
दक्षिण 24 परगना जिले की इस सीट पर दोबारा चुनाव कराने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की कुल 35 कंपनियां तैनात की गई हैं। स्वतंत्र चुनाव के लिए प्रशासन ने हर सिंगल बूथ पर आठ सुरक्षा जवानों की तैनाती सुनिश्चित की है।
इसके साथ ही किसी भी अप्रिय घटना या गड़बड़ी पर तुरंत एक्शन लेने के लिए 30 क्विक रिस्पॉन्स टीमें (क्यूआरटी) लगातार गश्त कर रही हैं। फलता सीट पर कुल 285 बूथ बनाए गए हैं, जहां 2.36 लाख से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।
परफ्यूम और टेप से ईवीएम के साथ हुई थी छेड़छाड़
इस सीट पर पुनर्मतदान की नौबत इसलिए आई क्योंकि पिछली बार कई बूथों से ईवीएम पर परफ्यूम जैसा पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाने की शिकायतें मिली थीं। चुनाव आयोग की विशेष जांच में कम से कम 60 बूथों पर छेड़छाड़ के पुख्ता सबूत मिले थे।
इसके अलावा कई मतदान केंद्रों पर लगे लाइव वेब कैमरों के फुटेज गायब करने की कोशिशें भी पकड़ी गई थीं। इसके बाद चुनाव आयोग ने पीठासीन अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पुराने मतदान को पूरी तरह रद्द करने का आदेश दिया था।
Author: Sourav Banerjee


