कर्नाटक में चक्का जाम की आहट! 20 मई से थम सकते हैं सरकारी बसों के पहिए, आपकी यात्रा पर मंडरा रहा है बड़ा संकट

Karnataka News: कर्नाटक में आगामी 20 मई से आम जनता की मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं। राज्य परिवहन निगमों के हजारों कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की योजना बना रहे हैं। यदि सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच सहमति नहीं बनी, तो बेंगलुरु सहित पूरे राज्य में बस सेवाएं ठप हो जाएंगी। KSRTC और BMTC जैसी प्रमुख सेवाओं के बंद होने से लाखों यात्रियों का दैनिक आवागमन प्रभावित होगा। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं और सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रहे हैं।

वेतन वृद्धि के फैसले पर भड़के कर्मचारी संगठन

हड़ताल की मुख्य वजह राज्य सरकार का हालिया वेतन वृद्धि का फैसला है। सरकार ने परिवहन कर्मचारियों के वेतन में 12.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। हालांकि, कर्मचारी यूनियनें इस फैसले को नाकाफी और अपमानजनक मान रही हैं। उनकी मांग है कि वेतन संशोधन 1 जनवरी 2024 से लागू हो और यह कम से कम 25 प्रतिशत होना चाहिए। यूनियनों का कहना है कि सरकार ने बिना किसी पूर्व चर्चा के एकतरफा निर्णय लिया है, जिससे कर्मचारियों में गहरा असंतोष है।

बकाया भुगतान और समान वेतन की उठ रही मांग

परिवहन कर्मचारी केवल नई वेतन वृद्धि ही नहीं, बल्कि अपने पुराने बकाये की भी मांग कर रहे हैं। संगठनों का आरोप है कि पिछले वेतन संशोधन का ₹513.08 करोड़ का भुगतान अभी तक लंबित है। इसके अलावा, कोविड-19 महामारी के दौरान रोके गए लाभ भी अब तक जारी नहीं किए गए हैं। कर्मचारियों की एक प्रमुख मांग अन्य सरकारी विभागों के समान 27.5 प्रतिशत वेतन वृद्धि प्राप्त करना है। वे महंगाई भत्ते (DA) को मूल वेतन में जोड़ने की मांग पर भी अड़े हैं।

इन प्रमुख बस सेवाओं पर पड़ेगा सीधा असर

हड़ताल शुरू होने पर राज्य की लाइफलाइन कही जाने वाली चार परिवहन संस्थाओं की सेवाएं पूरी तरह प्रभावित होंगी। इसमें बेंगलुरु शहर की जीवनरेखा BMTC और अंतरराज्यीय सेवा KSRTC शामिल हैं। साथ ही उत्तर कर्नाटक क्षेत्र की NWKRTC और कल्याणा कर्नाटक क्षेत्र की KKRTC बसों का संचालन भी बंद हो सकता है। इससे न केवल स्थानीय यात्रियों बल्कि लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। प्राइवेट बस ऑपरेटर इस स्थिति का फायदा उठाकर किराया बढ़ा सकते हैं।

मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप की उम्मीद और वार्ता का विकल्प

इतने बड़े संकट के बावजूद कर्मचारी संगठनों ने बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि वे जनता को परेशान नहीं करना चाहते, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति दयनीय हो गई है। कर्मचारियों की मांग है कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद इस मामले में हस्तक्षेप करें। यदि मुख्यमंत्री उन्हें सीधे बातचीत के लिए आमंत्रित करते हैं, तो हड़ताल को टाला जा सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस संकट को कैसे टालती है।

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