पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारी भूचाल, टीएमसी सांसद को बचाने के दबाव में वरिष्ठ नेता ने दिया इस्तीफा

West Bengal News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। कोलकाता नगर निगम की वरिष्ठ तृणमूल कांग्रेस नेता देबोलीना बिस्वास ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। उनके इस बड़े कदम ने पूरी सत्तारूढ़ पार्टी को भीतर से पूरी तरह हिला कर रख दिया है।

देबोलीना बिस्वास कोलकाता नगर निगम के सबसे महत्वपूर्ण माने जाने वाले नौवें बरो की अध्यक्ष पद पर कार्यरत थीं। उनका यह चौंकाने वाला इस्तीफा ठीक उस समय आया है, जब महज एक दिन पहले नगर पालिका ने टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी की कंपनी और परिवार की संपत्तियों को कानूनी नोटिस भेजा था।

अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर कानूनी नोटिस से मचा हड़कंप

कोलकाता नगर पालिका ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के कालीघाट और हरीश मुखर्जी रोड स्थित ठिकानों सहित करीब 17 संपत्तियों पर कानूनी नोटिस भेजा है। इस कार्रवाई के ठीक बाद से ही बरो अध्यक्ष देबोलीना बिस्वास पर नीतियों को बदलने और अभिषेक को बचाने का भारी आंतरिक दबाव बनाया जा रहा था।

समाचार18 बांग्ला मीडिया के अनुसार, देबोलीना बिस्वास तृणमूल कांग्रेस की एक बेहद मजबूत और जमीनी पकड़ रखने वाली फायरब्रांड नेता मानी जाती हैं। वह कोलकाता नगर निगम के वार्ड नंबर 74 से पार्षद भी हैं। वह अपनी बेबाक और ईमानदार कार्यशैली के लिए राजनीतिक हलकों में काफी जानी जाती हैं।

सिद्धांतों से समझौता न करने पर छोड़ा बड़ा पद

देबोलीना बिस्वास ने मीडिया के सामने आकर खुद इस पूरे मामले का विस्फोटक खुलासा किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि कुछ सच तो सच ही होते हैं, उन्हें झुठलाया नहीं जा सकता। उन्होंने अपनी नीतियों और सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय गरिमा के साथ तुरंत पद छोड़ना बेहतर समझा।

फायरब्रांड नेता देबोलीना ने बरो अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा पार्टी नेता माला रॉय को भेज दिया है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह टीएमसी नहीं छोड़ रही हैं। वह वार्ड 74 की पार्षद के रूप में जनता के बीच रहकर भ्रष्ट नीतियों के खिलाफ अपनी जंग जारी रखेंगी।

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सख्ती का दिखने लगा असर

इस पूरे सियासी ड्रामे को राज्य की बदली हुई राजनीतिक कमान और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की सख्ती से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सत्ता संभालते ही भ्रष्ट नेताओं की अवैध संपत्तियों की जांच और उसके कड़े हिसाब-किताब की बात स्पष्ट रूप से कही थी।

शुभेंदु अधिकारी के इसी कड़े तेवर का असर है कि अब नगर पालिका भी पूरी तरह एक्शन में नजर आ रही है। खुद टीएमसी के ईमानदार नेता अब भ्रष्टाचार को छिपाने के आंतरिक दबाव के खिलाफ खुलकर सामने आ रहे हैं और बगावत का रास्ता चुन रहे हैं।

Author: Sourav Banerjee

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