Meerut News: इंटरनेट और सोशल मीडिया देखकर खुद अपना इलाज करना युवाओं के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। शहर में हाल ही में ऐसे कई गंभीर मामले सामने आए हैं। युवा सामान्य लक्षणों पर खुद दवाइयां खा रहे हैं। इससे उनकी किडनी, लीवर और दिल पर बेहद बुरा असर पड़ रहा है।
ऑनलाइन जानकारी से बर्बाद हो रही युवाओं की सेहत
मेरठ के एक बाइस साल के बीटेक छात्र को कुछ दिनों तक बुखार रहा। उसने इंटरनेट पर लक्षण खोजे और खुद ही एंटीबायोटिक खाना शुरू कर दिया। हालत बिगड़ने पर उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल जांच में पता चला कि छात्र की किडनी बुरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
शास्त्रीनगर के एक अन्य अठाइस वर्षीय युवक ने सोशल मीडिया देखकर जिम सप्लीमेंट लेना शुरू किया। कुछ महीनों बाद उसे यूरिन इंफेक्शन और हाई बीपी की गंभीर शिकायत हुई। डॉक्टरों ने बताया कि स्टेरॉयड के कारण उसकी किडनी खराब हो रही थी। एक युवती ने भी ऑनलाइन देखकर हार्मोन की दवाएं खाईं।
युवती को तेज घबराहट और ब्लड प्रेशर की समस्या के बाद अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। स्वास्थ्य विभाग ने इन गंभीर मामलों को देखते हुए एक अध्ययन किया है। इस स्टडी में कई बेहद चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। अस्पताल पहुंचने वाले अठारह से पैंतीस साल के युवा सबसे ज्यादा पीड़ित हैं।
बिना सलाह सीधे मेडिकल स्टोर से खरीद रहे दवा
ओपीडी में आने वाले चालीस प्रतिशत मरीजों ने इंटरनेट देखकर दवा शुरू की थी। वहीं करीब तीस फीसदी युवाओं ने मेडिकल स्टोर से सीधे एंटीबायोटिक खरीदी थी। कई मरीजों के ब्लड टेस्ट में क्रिएटिनिन का स्तर बहुत बढ़ा हुआ मिला। दर्द निवारक दवाओं के लगातार सेवन से किडनी में सूजन आ गई।
जिम सप्लीमेंट और स्टेरॉयड का सेवन करने वाले युवाओं में हार्ट रेट बढ़ने की शिकायत मिली है। रिपोर्ट बताती है कि युवाओं को दवाओं के साइड इफेक्ट की बिल्कुल जानकारी नहीं थी। विशेषज्ञ इसे एक उभरता हुआ बड़ा स्वास्थ्य संकट मान रहे हैं। गूगल आधारित इलाज का यह चलन तेजी से बढ़ा है।
नई पीढ़ी बालों के झड़ने या हार्मोनल बदलाव जैसी समस्याओं को सीधे इंटरनेट पर खोजती है। इसके बाद युवा फिटनेस इन्फ्लुएंसर्स की बातों में आकर अपना इलाज शुरू कर देते हैं। सबसे ज्यादा बिना डॉक्टरी पर्चे के एंटीबायोटिक्स और पेनकिलर्स का इस्तेमाल हो रहा है। यह तरीका शरीर को खोखला कर रहा है।
किडनी और दिल पर पड़ रहा सबसे ज्यादा असर
डॉक्टरों का कहना है कि गलत दवाओं से किडनी पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है। लगातार भारी दवाएं खाने से किडनी की खून की सप्लाई बाधित हो जाती है। कई युवा मरीज तब अस्पताल पहुंचे जब उनकी किडनी पूरी तरह जवाब दे चुकी थी। यह स्थिति बेहद गंभीर और चिंताजनक बन गई है।
आजकल सोशल मीडिया पर फैट बर्नर और एनर्जी बूस्टर का जमकर प्रचार होता है। इन उत्पादों में भारी मात्रा में स्टेरॉयड और घातक रसायन होते हैं। इनका सीधा असर युवाओं के दिल पर पड़ता है। इससे हार्टबीट बढ़ने और ब्लड प्रेशर असंतुलित होने जैसी गंभीर समस्याएं तेजी से पैदा हो रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन पहले ही एंटीबायोटिक के गलत इस्तेमाल पर कड़ी चेतावनी जारी कर चुका है। बिना जरूरत दवा खाने से शरीर पर दवाओं का असर खत्म होने लगता है। भविष्य में इससे सामान्य संक्रमण भी जानलेवा बन सकता है। जिम कल्चर और जल्दी ठीक होने की चाहत इसे खूब बढ़ावा दे रही है।
डॉक्टर की सलाह के बिना इलाज करना बेहद खतरनाक
मेरठ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कटारिया ने इस चलन पर गहरी चिंता जताई है। उनका कहना है कि इंटरनेट ने लोगों को आधी-अधूरी जानकारी दी है। मरीज केवल लक्षण देखकर अपनी बीमारी खुद तय कर लेते हैं। बिना जांच और डॉक्टरी सलाह के कोई भी दवा खाना बहुत खतरनाक है।
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. वरद के मुताबिक युवा अच्छी सेहत के नाम पर स्टेरॉयड ले रहे हैं। इसका सबसे ज्यादा बुरा प्रभाव दिल की धड़कनों पर पड़ रहा है। कम उम्र में ही हार्ट से जुड़ी बीमारियां तेजी से पैर पसार रही हैं। मेडिकल निगरानी के बिना दवाएं लेना भविष्य के लिए बड़ा खतरा है।
Author: Asha Thakur


