Tamil Nadu News: तमिलनाडु में हिंदी भाषा को लेकर दशकों पुराना विवाद एक बार फिर गर्मा गया है। राज्य की नवनिर्वाचित टीवीके सरकार ने भाषा नीति पर एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने साफ कर दिया है कि प्रदेश में पुरानी दो-भाषा नीति ही पूरी सख्ती से लागू रहेगी।
तमिलनाडु के स्कूली शिक्षा मंत्री राजमोहन ने कार्यभार संभालते ही इस संवेदनशील मुद्दे पर सरकार का रुख पूरी तरह स्पष्ट किया है। उन्होंने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ पहली उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह नीतिगत घोषणा की है।
तमिलनाडु के स्कूलों में लागू रहेगा सिर्फ दो-भाषा फॉर्मूला
कैबिनेट मंत्री राजमोहन ने कहा कि विजय सरकार के कार्यकाल के दौरान भी राज्य की भाषाई नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों में केवल तमिल और अंग्रेजी की दो-भाषाई प्रणाली ही जारी रहेगी। उन्होंने इसे अपनी पार्टी की मुख्य विचारधारा बताया है।
शिक्षा मंत्री ने कड़े शब्दों में कहा कि वैश्विक स्तर पर संवाद करने के लिए दूसरी भाषा के रूप में सिर्फ अंग्रेजी ही काफी है। राज्य सरकार केंद्र या किसी अन्य मोर्चे से आने वाले किसी भी अप्रत्यक्ष राजनीतिक दबाव के आगे बिल्कुल नहीं झुकेगी। पार्टी अपने सिद्धांतों से कोई समझौता नहीं करेगी।
प्रशासनिक योजना के अनुसार तमिलनाडु के भीतर संपर्क की मुख्य भाषा हमेशा तमिल ही बनी रहेगी। बाहरी दुनिया और अन्य राज्यों के लोगों से जुड़ने के लिए छात्र अंग्रेजी का उपयोग करेंगे। शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि यह नीति तमिल संस्कृति की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।
केंद्र की पीएम श्री योजना और तीन-भाषा नीति को झटका
तमिलनाडु सरकार का यह तीखा बयान ऐसे समय पर आया है जब केंद्र सरकार राष्ट्रीय स्तर पर ‘पीएम श्री’ (PM SHRI) योजना को लागू कर रही है। केंद्र इसके माध्यम से देश के सभी राज्यों में तीन-भाषा फॉर्मूला अपनाने के लिए लगातार विशेष जोर दे रही है।
तीन-भाषा नीति के तहत स्कूली बच्चों को क्षेत्रीय भाषा और अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी भाषा भी सिखानी होती है। हालांकि, टीवीके सरकार के नए फैसले के बाद अब तमिलनाडु के स्कूलों में हिंदी को जगह मिलने की उम्मीद पूरी तरह खत्म हो गई है।
केंद्रीय योजनाओं पर बात करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार पहले यह जांच करेगी कि केंद्र की शर्तें राज्य के शैक्षणिक लक्ष्यों के अनुकूल हैं या नहीं। इसके बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला छात्रों के व्यावहारिक सशक्तिकरण से जुड़ा है।
Author: Karthik Srinivasan

