सड़कों पर प्रदर्शन करने वालों को चीफ जस्टिस की दो टूक, विरोध के नाम पर आम जनता को परेशान करना बंद करें!

Delhi News: भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बात-बात पर सड़क जाम करने और हिंसक प्रदर्शन करने वालों को सख्त हिदायत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि हर नागरिक को शांतिपूर्ण विरोध का संवैधानिक अधिकार है। लेकिन वे कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी समस्या पैदा नहीं कर सकते।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा कि प्रदर्शनकारियों की वजह से आम जनता को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। दरअसल, सैकड़ों लोग नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का नाम बदलने की मांग को लेकर लगातार उग्र प्रदर्शन कर रहे हैं।

हवाई अड्डे का नाम बदलने की मांग पर युवाओं पर दर्ज हुए केस

स्थानीय प्रशासन ने पहले प्रदर्शनकारियों को समझाने की काफी कोशिश की थी। जब आंदोलनकारी नहीं माने, तो पुलिस ने कई युवाओं के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज कर लिए। इसी पुलिसिया कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शनकारी इंसाफ के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे।

सीजेआई सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की तीन सदस्यीय पीठ ने इस पर सुनवाई की। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि सभी को वैध विरोध का हक है। लेकिन किसी को धमकी देने या अराजकता फैलाने की इजाजत नहीं मिल सकती।

सुप्रीम कोर्ट ने प्रकाशझोट सामाजिक संस्था की ओर से दायर याचिका पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि यह पूरा मुद्दा नीति निर्माण के अंतर्गत आता है। इसलिए अदालत इस प्रशासनिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं कर सकती।

नीतिगत मामलों में दखल नहीं देगा सुप्रीम कोर्ट

इस संगठन ने बॉम्बे हाई कोर्ट के पुराने आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के हवाई अड्डे का नाम बदलने के प्रस्ताव संबंधी याचिका खारिज की थी। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या नाम तय करना अदालत का काम है?

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कोर्ट केंद्र सरकार के लिए बस एक समयसीमा तय कर दे। इस पर सीजेआई ने कहा कि न्यायपालिका को नीतिगत मामलों में आदेश पारित नहीं करना चाहिए। यह सीधे तौर पर सरकार के नीति निर्माण में दखल होगा।

सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनी हुई सरकारें अपने हिसाब से फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट के नवंबर 2025 के आदेश में दखल देने से मना करते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।

Author: Harikarishan Sharma

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