Geneva News: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अफ्रीकी देशों कांगो और युगांडा में तेजी से पैर पसार रहे ईबोला रोग के प्रकोप को देखते हुए रविवार को ‘अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल’ घोषित कर दिया है। डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने बताया कि क्षेत्र में अब तक 300 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं। इस घातक और संक्रामक वायरस की वजह से 88 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिसने वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।
कोविड-19 जैसी वैश्विक महामारी नहीं है ईबोला, अंतरराष्ट्रीय सीमाएं बंद न करने की दी सलाह
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोशल मीडिया पर जारी एक आधिकारिक पोस्ट में स्थिति को स्पष्ट किया है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार यह वर्तमान प्रकोप कोविड-19 की वैश्विक महामारी की तरह पूर्ण महामारी आपातकाल के कड़े मानदंडों को पूरा नहीं करता है। इसी वजह से वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने प्रभावित देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बंद न करने की सख्त सलाह दी है। संगठन का मानना है कि सीमाएं बंद करने से आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति बाधित हो सकती है।
शरीर के तरल पदार्थों से फैलता है अत्यधिक संक्रामक संक्रमण, गंभीर और अक्सर घातक होती है बीमारी
चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार ईबोला वायरस अत्यधिक संक्रामक प्रकृति का है, जो एक इंसान से दूसरे इंसान में बहुत तेजी से फैलता है। यह जानलेवा वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे कि उल्टी, रक्त, लार या वीर्य के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। ईबोला के कारण उत्पन्न होने वाली बीमारी हालांकि दुनिया में बहुत दुर्लभ मानी जाती है, लेकिन यह इंसानी शरीर के लिए बेहद गंभीर और अक्सर घातक साबित होती है।
दुर्लभ बंडिबुग्यो वायरस के कारण मचा हाहाकार, वर्तमान में कोई स्वीकृत वैक्सीन या दवा उपलब्ध नहीं
विभिन्न देशों के स्वास्थ्य अधिकारियों ने गहन लैब जांच के बाद पुष्टि की है कि वर्तमान प्रकोप बंडिबुग्यो वायरस (Bundibugyo virus) के कारण फैल रहा है। यह खतरनाक वायरस ईबोला रोग का एक बेहद दुर्लभ रूप माना जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस विशिष्ट स्ट्रेन के इलाज के लिए अभी तक दुनिया में कोई भी स्वीकृत दवा या प्रभावी वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। चिकित्सा दल मरीजों को केवल सहायक उपचार ही प्रदान कर पा रहे हैं।
इतिहास में केवल तीसरी बार सामने आया बंडिबुग्यो वायरस, कांगो और युगांडा में पहले भी मचा चुका है तबाही
अफ्रीकी महाद्वीप के कूटनीतिक इतिहास में कांगो और युगांडा के भीतर अब तक 20 से अधिक बार ईबोला के विभिन्न प्रकोप दर्ज हो चुके हैं। इसके बावजूद चिकित्सा इतिहास में यह केवल तीसरी बार है जब बंडिबुग्यो वायरस के सक्रिय होने की आधिकारिक सूचना मिली है। यही वजह है कि दोनों देशों की स्वास्थ्य प्रणालियां इस अदृश्य और लाइलाज दुश्मन के सामने पूरी तरह लाचार नजर आ रही हैं और वैश्विक मदद की गुहार लगा रही हैं।
कांगो के पूर्वी प्रांत इटुरी से शुरू हुआ संक्रमण, दक्षिण सूडान और युगांडा की सीमाओं पर बढ़ा सबसे बड़ा खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में बताया कि कांगो में मिले कुल पुष्ट मामलों में से केवल दो मामले ही ऐसे हैं, जो पड़ोसी देश युगांडा में रिपोर्ट किए गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने शुक्रवार को कांगो के अशांत पूर्वी प्रांत इटुरी में इस बीमारी के तेजी से फैलने की पुष्टि की थी। यह इलाका भौगोलिक रूप से युगांडा और दक्षिण सूडान की सीमाओं के बेहद करीब स्थित है, जिससे वायरस ट्रांसफर का खतरा बढ़ गया है।
अफ्रीका रोग नियंत्रण केंद्र ने जारी किए डराने वाले आंकड़े, 336 संदिग्ध मामलों की बारीकी से हो रही निगरानी
अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (Africa CDC) ने इस स्वास्थ्य संकट पर ताजा आंकड़े जारी कर दुनिया को सतर्क किया है। एजेंसी के अनुसार जमीनी स्तर पर अब तक कुल 336 संदिग्ध मामलों की पहचान की जा चुकी है, जिन्हें आइसोलेशन में रखकर बारीकी से मॉनिटर किया जा रहा है। कुल 88 मौतों के बाद प्रभावित क्षेत्रों में चिकित्सा आपातकाल की स्थिति है और अंतरराष्ट्रीय टीमें संक्रमण को रोकने के लिए युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।


