थोक महंगाई का महाविस्फोट! 42 महीनों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे दाम, कच्चे तेल और युद्ध संकट ने बढ़ाई देश की टेंशन

New Delhi News: अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी यूएस-ईरान युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतें लगातार आसमान छू रही हैं। होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने के कारण अब धातुओं के दाम भी तेजी से भाग रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के आर्थिक अनुसंधान विंग के अनुसार, आने वाले महीनों में थोक महंगाई का दबाव देश पर और ज्यादा बढ़ सकता है। यदि खाड़ी देशों में जल्द शांति समझौता नहीं हुआ, तो रुपया और कमजोर होगा जिससे भारत की इंपोर्ट कॉस्ट काफी बढ़ जाएगी।

थोक मूल्य सूचकांक में बड़ा उछाल और ईंधन संकट

देश की थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई अप्रैल 2026 में तेजी से बढ़कर 8.3 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गई है। यह अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है, जबकि पिछले साल अप्रैल 2025 में यह महज 0.9 प्रतिशत थी। थोक महंगाई में आए इस तगड़े उछाल की मुख्य वजह ईंधन और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की कीमतों में लगी आग है। ईंधन और बिजली की महंगाई इस दौरान 42 महीनों के रिकॉर्ड स्तर 24.7 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

खनिज तेलों और विमान ईंधन की कीमतों में भारी आग

थोक बाजार में खनिज तेल सूचकांक के भीतर सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सालाना आधार पर करीब 39.5 फीसदी की बड़ी तेजी देखी गई। इसमें भी एविएशन टर्बाइन फ्यूल के दाम सालाना आधार पर 100 प्रतिशत से अधिक बढ़ चुके हैं। इसके साथ ही नेफ्था, फर्नेस ऑयल, पेट्रोल, केरोसिन और डीजल की कीमतें भी बहुत तेज भागी हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई 54.2 प्रतिशत की भारी तेजी ने इस घरेलू संकट को और गहरा कर दिया है।

मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स और मेटल्स बाजार का हाल

औद्योगिक क्षेत्र के मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की थोक महंगाई भी बढ़कर अब 4.6 प्रतिशत हो गई है, जो सितंबर 2022 के बाद का सर्वोच्च स्तर है। कुल 22 सब-इंडेक्सेस में से 13 क्षेत्रों में बहुत तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें बेसिक मेटल्स, मशीनरी, वस्त्र, रसायन और दवाएं सबसे आगे रहे हैं। घरेलू बाजार में एल्युमिनियम की कीमतें साल-दर-साल 19.2 प्रतिशत बढ़ी हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर एल्युमिनियम में 51.8 प्रतिशत और तांबे में 41.1 प्रतिशत का तगड़ा उछाल देखा गया है। महंगाई का क्षेत्र (अप्रैल 2026) मौजूदा थोक दर (%) रिकॉर्ड स्तर का समय कुल थोक महंगाई (WPI) 8.3% अक्टूबर 2022 के बाद उच्चतम ईंधन और बिजली (Fuel & Power) 24.7% 42 महीनों का रिकॉर्ड स्तर मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स 4.6% सितंबर 2022 के बाद उच्चतम

खाद्य पदार्थों की कीमतों में राहत और भविष्य की चिंता

इस चौतरफा आर्थिक दबाव के बीच खाद्य महंगाई से आम जनता को थोड़ी राहत जरूर मिली है। खाने-पीने की चीजों की थोक महंगाई अप्रैल 2025 के 3.3 प्रतिशत से घटकर अप्रैल 2026 में 2.3 प्रतिशत पर आ गई है। अनाज और दालों की कीमतों में लगातार आ रही गिरावट ने इस राहत को बनाए रखा है। हालांकि, बाजार में सब्जियों, दूध, अंडे और मांस की कीमतों में अब भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जिस पर मानसून की चाल का गहरा असर देखने को मिल सकता है।

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