International News: बंगाल की खाड़ी में बहुत जल्द एक बड़ा भू-राजनीतिक बदलाव होने जा रहा है। बांग्लादेश और अमेरिका के बीच एक बेहद अहम रक्षा समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस रणनीतिक डील के तहत अमेरिकी सेना को बांग्लादेश के बंदरगाहों और एयरफील्ड्स तक सीधी पहुंच मिल सकती है।
इस कदम को लेकर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना पहले ही गंभीर चेतावनी जारी कर चुकी थीं। देश के वर्तमान प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार में अब उनका वही पुराना डर सच साबित होता दिख रहा है। भारत के ठीक बगल में अमेरिकी सेना की मौजूदगी नई दिल्ली के लिए भी एक बड़ा अलर्ट है।
डोनाल्ड ट्रंप के निजी पत्र ने खोला इस बड़ी डील का राज
एनालिटिकल सेंटर ‘सॉलिड इन्फो’ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दोनों देशों के बीच यह डील लगभग फाइनल हो चुकी है। हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने ढाका का दौरा किया था। वहां पूर्व में हस्ताक्षरित ‘एग्रीमेंट ऑन रिसिप्रोकल ट्रेड’ को पूरी तरह लागू करने पर गहन चर्चा की गई थी।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे रक्षा सौदे को सीधे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान से जोड़ा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक निजी पत्र में साफ शब्दों में लिखा है कि आगे मिलने वाले बड़े आर्थिक फायदे दो अहम रक्षा समझौतों जीएसओएमआईए (GSOMIA) और एसीएसए (ACSA) की मंजूरी पर ही निर्भर करेंगे।
चटगांव बंदरगाह का उपयोग करेंगे अमेरिकी युद्धपोत और विमान
प्रस्तावित एसीएसए समझौते के तहत अमेरिकी युद्धपोत और सैन्य विमान बांग्लादेश के बेहद महत्वपूर्ण चटगांव और मातरबारी बंदरगाहों का खुलकर इस्तेमाल कर सकेंगे। अमेरिकी सेना यहां आसानी से ईंधन भरने, तकनीकी मरम्मत और जरूरी लॉजिस्टिक्स सप्लाई जैसे महत्वपूर्ण सामरिक काम बिना किसी बाधा के कर पाएगी।
इसके साथ ही खुफिया जानकारियों को आपस में साझा करने के लिए जीएसओएमआईए समझौता काम करेगा। इन दोनों समझौतों के लागू होने के बाद अमेरिकी रक्षा बलों को पूरी बंगाल की खाड़ी पर चौबीसों घंटे पैनी निगरानी रखने की अद्भुत और रणनीतिक क्षमता हासिल हो जाएगी।
आर्थिक तंगी के कारण अमेरिकी शर्तों के आगे झुका ढाका
विशेषज्ञों के अनुसार बांग्लादेश ने अपनी बेहद खराब आर्थिक मजबूरी के चलते यह कदम उठाने का फैसला किया है। देश के टेक्सटाइल सेक्टर में 19% भारी टैरिफ छूट और कुछ जरूरी उत्पादों पर ड्यूटी-फ्री व्यवस्था को बनाए रखने के बदले ढाका को अपने सबसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने खोलने पड़ रहे हैं।
इस फैसले से दक्षिण एशिया में जियोपॉलिटिक्स की पूरी दिशा बदल जाएगी। अब तक बांग्लादेश अपने हथियारों और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए चीन पर पूरी तरह निर्भर रहा है। ढाका के करीब 70% आधुनिक हथियार बीजिंग से ही आते हैं, जिससे चीन को बड़ा झटका लगा है।
चीन के ड्रीम प्रोजेक्ट ‘मलक्का स्ट्रेट बाईपास’ पर लगेगी लगाम
अमेरिका की इस क्षेत्र में सीधी एंट्री से चीन की ‘मलक्का स्ट्रेट को बाईपास करने’ की मुख्य वैश्विक रणनीति बेहद कमजोर पड़ जाएगी। चीन ने व्यापार के लिए म्यांमार और बांग्लादेश के रास्ते जो वैकल्पिक रूट तैयार किया था, वह अब पूरी तरह अमेरिकी सेना की निगरानी के दायरे में आ जाएगा।
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पहले ही दावा किया था कि अमेरिका उन पर सेंट मार्टिन द्वीप को सैन्य इस्तेमाल के लिए देने का लगातार दबाव बना रहा था। उन्होंने साफ कहा था कि यदि वह देश की संप्रभुता से समझौता कर लेतीं, तो हिंसक विरोध प्रदर्शन के बावजूद उनकी सत्ता सुरक्षित बची रहती।

