भोजशाला पर एएसआई का नया आदेश जारी! अब 365 दिन होगी पूजा, वापस आएगी मां वाग्देवी की मूर्ति

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने धार की भोजशाला पर एक बहुत बड़ा और नया आदेश जारी किया है। अब हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूरे साल यानी 365 दिन निर्बाध रूप से पूजा करने का पूरा अधिकार मिल गया है। यह आदेश 16 मई 2026 को जारी किया गया है। एएसआई ने अब इसे कमाल मौला मस्जिद की जगह राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला माना है।

एएसआई ने भोजशाला को माना संस्कृत पाठशाला

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के इस नए आदेश में भोजशाला को स्पष्ट रूप से राजा भोज द्वारा स्थापित संस्कृत पाठशाला कहा गया है। आदेश में पूर्व में इस्तेमाल होने वाले कमाल मौला मस्जिद नाम का कोई भी जिक्र नहीं है। एएसआई ने अपने आदेश में साफ कहा है कि यह स्थान प्राचीन काल से ही संस्कृत शिक्षा और बड़े शोध का एक ऐतिहासिक केंद्र रहा है। यह मुख्य रूप से विद्या की देवी मां वाग्देवी यानी सरस्वती को समर्पित मंदिर है।

अब हर दिन होगी मां सरस्वती की पूजा

इस बड़े और ऐतिहासिक फैसले से अब हिंदू समुदाय को एक बड़ी राहत मिली है। श्रद्धालु अब साल के सभी तीन सौ पैंसठ दिन परिसर में बिना किसी रोकटोक के जा सकेंगे। लोग वहां आसानी से नियमित रूप से पूजा और आराधना कर सकेंगे। हालांकि एएसआई ने यह स्पष्ट किया है कि यह परिसर पहले की तरह ही एक संरक्षित स्मारक बना रहेगा। इसका पूरा संचालन और देखभाल प्राचीन स्मारक और पुरातत्व स्थल अधिनियम 1958 के नियमों के तहत होगा।

ब्रिटिश म्यूजियम से जल्द वापस आएगी मूर्ति

हाई कोर्ट के इस अहम फैसले के बाद धार की सांसद सावित्री ठाकुर ने एक बहुत बड़ा दावा किया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि लंदन का प्रसिद्ध ब्रिटिश संग्रहालय मां वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा को भारत लौटाने के लिए पूरी तरह तैयार है। साल 2017 और 2018 में ही इस विषय पर सहमती बन गई थी। तब राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने केंद्र सरकार की ओर से ब्रिटिश म्यूजियम के कड़े प्रबंधन से इस बारे में बातचीत की थी।

म्यूजियम की शर्त के कारण रुका था काम

सुब्रमण्यम स्वामी ने कई बार भोजशाला का दौरा किया था। ब्रिटिश म्यूजियम ने तब एक बड़ी शर्त रखी थी। म्यूजियम चाहता था कि मां वाग्देवी की प्रतिमा को उसके पुराने और मूल स्थान पर ही स्थापित किया जाए। उस समय यह गंभीर मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन था। इसलिए यह शर्त पूरी नहीं हो पाई थी। अब कोर्ट के आदेश के बाद यह बाधा पूरी तरह खत्म हो गई है। केंद्रीय मंत्री सांसद ठाकुर इस पर अहम चर्चा जल्द करेंगी।

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