New Delhi News: भारत सरकार ने देश के आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सोने और चांदी के आयात नियमों को बेहद कड़ा कर दिया है। सरकार ने कुछ खास प्रकार की सिल्वर बार्स (चांदी की ईंट) के इम्पोर्ट को तत्काल प्रभाव से ‘फ्री’ कैटेगरी से हटाकर ‘रिस्ट्रिक्टेड’ यानी प्रतिबंधित श्रेणी में डाल दिया है। इसके अलावा, सोने के आयात के लिए एडवांस ऑथराइजेशन जारी करने और उसकी निगरानी के नियमों को भी सख्त किया गया है। सरकार ने इन कीमती धातुओं पर लगने वाली इम्पोर्ट ड्यूटी को भी 6 फीसदी से सीधे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है।
चांदी की रिकॉर्ड तोड़ खपत और अरबों डॉलर का आयात
सरकार द्वारा उठाए गए इस सख्त कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह देश के भीतर सोने-चांदी की खपत में हुआ अप्रत्याशित इजाफा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल के महीने में भारत ने 411 मिलियन डॉलर की चांदी का आयात किया, जो सालाना आधार पर 157.16 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने कुल 12 अरब डॉलर की चांदी खरीदी है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 150 फीसदी की भारी बढ़ोतरी को दर्शाती है।
ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में भारी डिमांड
बुलियन मार्केट में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर होने के बावजूद देश के भीतर फिजिकल डिमांड में कोई कमी नहीं आई है। भारत ने ग्रीन एनर्जी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और पारंपरिक आभूषणों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस वित्त वर्ष में कुल 7,334.96 टन चांदी का भारी-भरकम आयात किया है, जो पिछले सालों के मुकाबले 42 प्रतिशत अधिक है। इतनी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बाहर जाने से देश के व्यापार घाटे पर सीधा और गहरा असर पड़ रहा है।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और होर्मुज स्ट्रेट का संकट
पश्चिमी देशों और खाड़ी क्षेत्र में जारी भारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत सरकार इस समय अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को सुरक्षित रखने पर सबसे ज्यादा ध्यान दे रही है। युद्ध की वजह से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ के जरिए होने वाली ग्लोबल सप्लाई बाधित हुई है, जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव 70 डॉलर से उछलकर अब 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे देश का खर्च बढ़ रहा है। आर्थिक मानक और आंकड़े मौजूदा स्थिति (वर्ष 2026) सालाना वृद्धि दर / प्रभाव सोना-चांदी इम्पोर्ट ड्यूटी 6% से बढ़ाकर 15% की गई गैर-जरूरी आयात रोकने का प्रयास अप्रैल में चांदी आयात (वैल्यू) 411 मिलियन डॉलर 157.16% की ऐतिहासिक बढ़त रुपये की ताजा स्थिति (शुक्रवार) 1 डॉलर = ₹96 के रिकॉर्ड स्तर पर घरेलू मुद्रा पर भारी दबाव
डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर, पीएम मोदी ने की विशेष अपील
इन चौतरफा वैश्विक चुनौतियों के बीच अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की स्थिति लगातार नाजुक होती जा रही है। शुक्रवार को बाजार बंद होने के समय 1 डॉलर की कीमत रिकॉर्ड 96 रुपये के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गई थी। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल की बचत करने के साथ-साथ अगले 1 साल तक सोना न खरीदने की भावुक अपील की है। हालांकि, भारत के पास अभी 11 महीने के आयात खर्च के लिए पर्याप्त फॉरेक्स रिजर्व मौजूद है।

