Health News: परिवार में हाई बीपी, स्ट्रोक या दिल की बीमारी का इतिहास होने पर अक्सर लोग डर जाते हैं। आम धारणा है कि जेनेटिक हिस्ट्री होने पर अगली पीढ़ी को यह बीमारी होना तय है। चिकित्सा विशेषज्ञ मानते हैं कि पारिवारिक इतिहास जोखिम को जरूर बढ़ाता है, लेकिन यह अनिवार्य नहीं है। सही समय पर सावधानी, संतुलित जीवनशैली और नियमित जांच से इस खतरे को टाला जा सकता है। इसलिए इसे डर नहीं बल्कि सतर्क होने का संकेत समझना चाहिए।
साइलेंट किलर बनकर अंगों को नुकसान पहुंचाता है हाइपरटेंशन
हाइपरटेंशन को चिकित्सा जगत में साइलेंट किलर कहा जाता है। यह बीमारी बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के भीतर धीरे-धीरे पनपती है। कई वर्षों तक मरीज को इसका पता भी नहीं चलता। इस दौरान यह उच्च रक्तचाप हृदय, मस्तिष्क, किडनी और रक्त वाहिकाओं को गंभीर नुकसान पहुंचाता रहता है। जब तक मरीज को लक्षणों का अहसास होता है, तब तक शरीर के महत्वपूर्ण अंग काफी हद तक प्रभावित हो चुके होते हैं।
जेनेटिक्स और खराब लाइफस्टाइल का खतरनाक गठजोड़
हाइपरटेंशन की समस्या अक्सर अनुवांशिक कारणों और खराब दिनचर्या के आपसी मेल से पैदा होती है। पारिवारिक इतिहास वाले लोगों के जीन शरीर में नमक के संतुलन को बिगाड़ सकते हैं। यह समस्या रक्त वाहिकाओं में कड़कपन लाती है और किडनी के कार्यों को प्रभावित करती है। जब ऐसे लोग अपनी जीवनशैली पर ध्यान नहीं देते, तो उनका जेनेटिक रिस्क सक्रिय हो जाता है। इसके बाद शरीर में रक्तचाप का स्तर अनियंत्रित होने लगता है।
इन आदतों के कारण तेजी से बढ़ता है हाई बीपी का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार दैनिक जीवन की कुछ खराब आदतें हाइपरटेंशन को बढ़ावा देती हैं। खानपान में नमक की अधिक मात्रा, बढ़ता वजन और शारीरिक निष्क्रियता इसके मुख्य कारण हैं। इसके अलावा खराब नींद, अत्यधिक शराब का सेवन, धूम्रपान और लगातार मानसिक तनाव इस खतरे को दोगुना कर देते हैं। प्रोसेस्ड फूड खाने वाले और गतिहीन जीवन जीने वाले लोगों में यह बीमारी बहुत तेजी से अपने पैर पसारती है।
बड़ी रिसर्च का दावा: अच्छी आदतें बदल सकती हैं किस्मत
करीब 2.7 लाख से अधिक लोगों पर हुई एक बड़ी साइंटिफिक स्टडी में राहत की बात सामने आई है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने जेनेटिक रिस्क के बावजूद अच्छी जीवनशैली अपनाई, उनका ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहा। स्वस्थ खानपान और नियमित कसरत करने से बीमारी की गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है। सही आदतें जेनेटिक प्रभाव को पूरी तरह खत्म नहीं करतीं, लेकिन बीमारी को टालने में मदद करती हैं।
नॉर्मल रिपोर्ट देखकर न बैठें बेफिक्र, रेगुलर स्क्रीनिंग है जरूरी
क्रायोवाइवा लाइफ साइंसेज की मेडिकल स्पोक्सपर्सन डॉक्टर गीतिका जस्सल के अनुसार लोग अक्सर नॉर्मल रिपोर्ट देखकर लापरवाह हो जाते हैं। यह सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है क्योंकि हाइपरटेंशन किसी भी उम्र में धीरे-धीरे विकसित हो सकता है। जिन परिवारों में इस बीमारी का इतिहास रहा हो, उन्हें कम उम्र से ही रेगुलर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। घर पर डिजिटल मॉनिटर की मदद से बीपी चेक करते रहने से शुरुआती संकेत मिल जाते हैं।


