Himachal News: हिमाचल प्रदेश के सोलन में आरएलए (RLA) वाहन पंजीकरण फर्जीवाड़े के मुख्य आरोपी गौरव भारद्वाज की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जिला अदालत सोलन ने आरोपी का पुलिस रिमांड तीन दिनों के लिए बढ़ा दिया है। पांच दिन की प्रारंभिक हिरासत खत्म होने के बाद पुलिस ने गौरव को कोर्ट में पेश किया था। जांच दल ने पूछताछ के लिए अतिरिक्त समय की मांग की थी। इसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अब पुलिस आरोपी से घोटाले के गहरे राज उगलवाएगी।
बिलासपुर में वर्षों से सक्रिय था घोटाले का जाल
पुलिस की अब तक की पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। आरोपी गौरव भारद्वाज का यह जाल बिलासपुर जिले में पिछले तीन-चार वर्षों से सक्रिय था। आरएलए कार्यालय में क्लर्क के पद पर तैनात गौरव कुछ दलालों के साथ मिलकर इस अवैध धंधे को चला रहा था। जांच में सामने आया है कि सरकारी ‘वाहन पोर्टल’ का दुरुपयोग कर सैकड़ों गाड़ियों का फर्जी पंजीकरण किया गया। इसमें बाहरी राज्यों के वाहनों के साथ हिमाचल के वाहन भी शामिल हैं।
हजारों वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन की आशंका
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, फर्जी तरीके से पंजीकृत किए गए वाहनों की कुल संख्या हजारों में हो सकती है। यह पूरा खेल आरएलए बिलासपुर और झंडूता में बड़े स्तर पर खेला गया। अब सोलन पुलिस उन सभी आरएलए अधिकारियों को पूछताछ के लिए तलब करने की तैयारी कर रही है, जिनके कार्यकाल में ये फर्जी पंजीकरण हुए थे। पुलिस इस मामले में किसी भी स्तर पर ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है। जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।
सोलन आरएलए के पोर्टल पर बनाई फर्जी आईडी
बिलासपुर में सफलता मिलने के बाद गौरव भारद्वाज ने दूसरे जिलों में अपना नेटवर्क फैलाने की योजना बनाई थी। इसके लिए उसने सबसे पहले सोलन को अपना निशाना बनाया। अक्टूबर 2025 में आरएलए सोलन के वाहन पोर्टल पर एसडीएम और रजिस्ट्रेशन क्लर्क की फर्जी लॉगिन आईडी तैयार की गई। इसी फर्जी आईडी के सहारे सोलन में भी धड़ल्ले से गाड़ियों का पंजीकरण शुरू हो गया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा जनवरी के अंतिम सप्ताह में हुआ था।
पुलिस की रडार पर विभाग के कई अधिकारी
डीएसपी सोलन अशोक भारद्वाज ने पुष्टि की है कि मुख्य आरोपी से पूछताछ लगातार जारी है। पुलिस इस घोटाले की हर कड़ी को जोड़ने का प्रयास कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान जिसकी भी संलिप्तता पाई जाएगी, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। पुलिस अब उन दलालों और विभागीय कर्मचारियों की पहचान करने में जुटी है, जिन्होंने इस संगठित अपराध में गौरव की मदद की थी। आने वाले दिनों में कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।


