Himachal News: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने केंद्र सरकार के खिलाफ सख्त रुख अपना लिया है। उन्होंने राज्य के पानी और जंगलों के अधिकारों के लिए आर-पार की लड़ाई का ऐलान किया है। सचिवालय में कर्मचारियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कई अहम बातें कहीं। रुकी हुई सैलरी, पुरानी पेंशन योजना (OPS) और बिजली सब्सिडी पर उन्होंने बेबाक राय रखी। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि आने वाले छह-सात महीनों में राज्य की आर्थिक स्थिति पूरी तरह सुधर जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने बिजली और सस्ती करने का बड़ा दावा भी किया है।
केंद्र से हर मोर्चे पर होगी लड़ाई
मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्पष्ट किया कि 1952 से मिल रही आरडीजी (राजस्व घाटा अनुदान) को बंद कर दिया गया है। यह अनुदान सरकार का नहीं, बल्कि हिमाचल की जनता का हक है। हिमाचल प्रदेश देश को 90 हजार करोड़ रुपये का पारिस्थितिकीय संतुलन प्रदान करता है। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान को हमारी नदियां सींचती हैं। पंजाब की बंपर खेती केवल हिमाचल के पानी की बदौलत है। इसलिए राज्य अपनी बहुमूल्य संपदा की लड़ाई हर मोर्चे पर लड़ेगा।
रुकी हुई सैलरी पर दिया बड़ा अपडेट
कर्मचारियों के रोके गए वेतन पर मुख्यमंत्री ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ कड़े फैसले लिए गए हैं। समय आने पर सभी कर्मचारियों को उनका पूरा वेतन दे दिया जाएगा। जुलाई-अगस्त तक प्रदेश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह पटरी पर आ जाएगी। सरकार ने कर्मचारियों को ओपीएस उनके बुढ़ापे को सुरक्षित करने के लिए दी है। इसका कोई भी राजनीतिक मकसद नहीं है।
आने वाले दिनों में होंगे और कड़े फैसले
सीएम सुक्खू ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से सहयोग की अपील की है। उन्होंने माना कि वेतन रुकने से भारी तनाव होता है। लेकिन राज्य हित में कई बार ऐसे कड़े बलिदान देने पड़ते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भविष्य में कुछ और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं। प्रदेश के खजाने पर थोड़ा सा कट लगा है। ऐसे में सबको मिलकर थोड़ा एडजस्ट करना होगा।
आम जनता के लिए और सस्ती होगी बिजली
बिजली क्षेत्र में अब बड़े सुधारों की शुरुआत हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने पिछली भाजपा सरकार की नीतियों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने बड़े होटलों तक को बिना सोचे-समझे बिजली सब्सिडी बांट दी। राज्य सरकार पहले बिजली बोर्ड को 2500 करोड़ रुपये की सब्सिडी देती थी। अब इस व्यवस्था में सुधार करके इसे 1200 करोड़ कर दिया गया है। सरकार का लक्ष्य इस खर्च को 800 से 1000 करोड़ तक लाना है। इसके बाद आम लोगों के लिए बिजली और ज्यादा सस्ती हो जाएगी।


