Bengaluru News: कर्नाटक में डीके शिवकुमार कैबिनेट के गठन के महज कुछ ही दिनों बाद सत्ताधारी कांग्रेस में बड़ी अंदरूनी कलह सामने आ गई है। मनपसंद पोर्टफोलियो न मिलने से नाराज वरिष्ठ कांग्रेस नेता और कैबिनेट मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है।
सूत्रों के मुताबिक रामलिंगा रेड्डी लंबे समय से प्रतिष्ठित बेंगलुरु डेवलपमेंट मंत्रालय की मांग कर रहे थे। हालांकि सरकार ने उन्हें जल संसाधन विभाग सौंप दिया और बेंगलुरु डेवलपमेंट का प्रभार कृष्णा बयरे गौडा को दे दिया। इस फैसले से आठ बार के वरिष्ठ विधायक बेहद नाराज हो गए हैं।
मेरे आत्मसम्मान को ठेस पहुंची है: रामलिंगा रेड्डी
इस्तीफा सौंपने के बाद रामलिंगा रेड्डी ने मीडिया से खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस पार्टी के वफादार कार्यकर्ता बने रहेंगे और विधायक के रूप में जनता की सेवा करेंगे। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव को भिजवा दिया है और स्पष्ट किया कि वह किसी व्यक्ति से नाराज नहीं हैं।
रामलिंगा रेड्डी ने नेतृत्व पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिद्धरामैया सरकार के समय भी उनसे बेंगलुरु डेवलपमेंट का वादा हुआ था। बाद में डीके शिवकुमार ने उनके घर आकर भरोसा दिया था कि मौका मिलने पर यह विभाग उन्हें ही मिलेगा। जल संसाधन मिलने से उनके आत्मसम्मान को गहरी चोट लगी है।
जानिए वरिष्ठ मंत्री ने अपने इस्तीफे में क्या लिखा
रामलिंगा रेड्डी ने मुख्यमंत्री को भेजे आधिकारिक त्यागपत्र में पार्टी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने लिखा कि कैबिनेट में स्थान देने के लिए वह कांग्रेस नेतृत्व को धन्यवाद देते हैं। वह मंत्री पद छोड़ रहे हैं क्योंकि उनकी अंतरात्मा इस तरह काम करने की अनुमति नहीं देती है।
रेड्डी ने मुख्यमंत्री से उनका इस्तीफा तुरंत स्वीकार करने का अनुरोध किया है। उन्होंने साफ किया कि वह विधानसभा के सदस्य बने रहेंगे और पार्टी के लिए काम करते रहेंगे। इस अचानक आए राजनीतिक भूचाल ने कर्नाटक सरकार के भीतर मचे घमासान को पूरी तरह उजागर कर दिया है।
विपक्ष ने साधा निशाना और उठाए गंभीर सवाल
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम पर विपक्ष ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता बसवन्ना और आंबेडकर के नाम पर शपथ लेते हैं, लेकिन केवल मलाईदार मंत्रालयों के लिए लॉबिंग करते हैं।
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि किसी भी मंत्री ने समाज कल्याण जैसे जरूरी विभाग खुद नहीं मांगे। इसके साथ ही विपक्ष ने १३ सदस्यीय कैबिनेट में एक भी महिला को शामिल न करने पर मुख्यमंत्री की आलोचना की। उन्होंने कहा कि नए मंत्रिमंडल में महिलाओं को कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।
Author: Harikarishan Sharma


