ईरान युद्ध की आग में झुलसा पाकिस्तान: पेट्रोल 400 के पार, मंत्री ने माना भारत से बहुत पीछे है मुल्क

Pakistan News: ईरान युद्ध के कारण दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका सबसे बुरा असर पड़ोसी देश पाकिस्तान में देखने को मिला है। पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें चार सौ रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई हैं। आसमान छूती महंगाई ने आम जनता की कमर पूरी तरह तोड़ दी है। मुल्क में लगातार बिगड़ते आर्थिक हालात के बीच हाहाकार मचा है। शहबाज सरकार संकट के सामने बेबस है।

आधी रात को जनता पर गिरा महंगाई का बम

आईएमएफ के भारी दबाव में शहबाज सरकार ने गुरुवार रात तेल की कीमतों में आग लगा दी। हाई-स्पीड डीजल में 19.39 रुपये की भारी बढ़ोतरी हुई है। इसकी नई कीमत 399.58 रुपये प्रति लीटर हो गई है। पेट्रोल 6.51 रुपये महंगा होकर 399.86 रुपये हो गया है। डीलर मार्जिन और टैक्स जुड़ने के बाद पेट्रोल पंपों पर कीमत चार सौ रुपये पार कर चुकी है। आम अवाम दाने-दाने को मोहताज हो रही है।

गुस्से से बचने के लिए नाममात्र की सब्सिडी का झुनझुना

जनता के आक्रोश से बचने के लिए सरकार ने सब्सिडी का दांव चला है। किसानों, ट्रांसपोर्टर्स और बाइकर्स को राहत देने की घोषणा हुई है। टू-व्हीलर वालों के लिए सौ रुपये प्रति लीटर की सब्सिडी दी जा रही है। हालांकि यह सुविधा तीन महीने के लिए केवल बीस लीटर तक सीमित रखी गई है। पेट्रोलियम लेवी हटने के बाद भी महंगाई पर कोई लगाम नहीं लगी है। मुल्क में हर महीने ईंधन की भारी खपत होती है।

पाकिस्तानी मंत्री ने भी माना- भारत की स्थिति बहुत मजबूत

पाकिस्तान के मंत्री परवेज मलिक ने स्वीकार किया है कि भारत की आर्थिक स्थिति बेहद मजबूत है। उन्होंने कहा कि भारत के पास विशाल विदेशी मुद्रा भंडार और रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण मौजूद है। इससे भारत किसी भी वैश्विक संकट को आसानी से संभाल लेता है। भारत के पास सत्तर दिनों का सुरक्षित तेल भंडार है। वहीं बदहाल पाकिस्तान के पास केवल पांच दिन का कच्चा तेल बचा है। आईएमएफ की शर्तों के कारण पाकिस्तान बेबस हो चुका है।

भारत की शानदार नीति से देश में तेल की कीमतें नियंत्रित

बीते कुछ सालों में भारत ने तेल आपूर्ति के लिए नए देशों के साथ मजबूत व्यापारिक संबंध बनाए हैं। सस्ते रूसी तेल की खरीदारी ने लागत को काफी कम रखा है। जरूरत पड़ने पर भारत सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर घरेलू बाजार में कीमतों को तुरंत नियंत्रित कर लेती है। इसके विपरीत पाकिस्तान के पास विकल्पों की भारी कमी है। डॉलर की किल्लत और खाली खजाने के कारण उसे बहुत महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है।

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