ई-कॉमर्स कंपनियों पर दिल्ली पुलिस का बड़ा एक्शन: चाकू, नकली पिस्टल और बिना पर्चे वाली दवाओं की बिक्री पर लगा बैन

Delhi News: दिल्ली पुलिस ने ऑनलाइन शॉपिंग और डिलिवरी प्लेटफॉर्म के जरिए हो रही अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए सख्त रुख अपनाया है। स्पेशल सीपी (क्राइम) देवेश चंद्र श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई एक हाई-लेवल मीटिंग में ई-कॉमर्स कंपनियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं। पुलिस ने अमेजन, फ्लिपकार्ट और ब्लिंकिट जैसी दिग्गज कंपनियों को पटाखों, प्रतिबंधित चाकू, नकली पिस्टल और बिना डॉक्टरी पर्चे वाली दवाओं की बिक्री तुरंत रोकने को कहा है। लापरवाही बरतने वाली कंपनियों के खिलाफ पुलिस सख्त कानूनी कार्रवाई करेगी।

अपराधियों का हथियार बन रहे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म

जॉइंट सीपी (क्राइम) सुरेंद्र कुमार ने बैठक के दौरान सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताओं को साझा किया। उन्होंने बताया कि अपराधी कानून की पहुंच से बचने के लिए तुरंत डिलिवरी देने वाले प्लेटफॉर्म का सहारा ले रहे हैं। इन वेबसाइट्स के जरिए बटनदार चाकू, नकली पिस्टल, जीपीएस जैमर और यहां तक कि पुलिस की वर्दी और बैज भी आसानी से खरीदे जा रहे हैं। यह सामान न केवल कानून का खुला उल्लंघन है, बल्कि दिल्ली की सार्वजनिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है।

बैन सामानों की लिस्टिंग हटाने का सख्त आदेश

क्राइम ब्रांच ने मीटिंग में शामिल सभी कंपनियों के प्रतिनिधियों को चार मुख्य बिंदुओं पर काम करने की हिदायत दी है। सबसे पहले, सभी अवैध और प्रतिबंधित वस्तुओं की लिस्टिंग को प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाया जाना चाहिए। इसके साथ ही, संवेदनशील सामान बेचने वाले विक्रेताओं के लिए अब कड़ी केवाईसी (KYC) प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा। पुलिस ने कंपनियों को एक ऐसा सिस्टम विकसित करने का निर्देश दिया है, जिससे संदिग्ध गतिविधियों की रियल-टाइम रिपोर्टिंग सीधे कानून प्रवर्तन एजेंसियों को की जा सके।

ई-फार्मेसी और दवाओं की ऑनलाइन बिक्री पर शिकंजा

दिल्ली सरकार के ड्रग्स कंट्रोल विभाग ने ई-फार्मेसी के जरिए दवाओं की अवैध सप्लाई पर कड़ी चिंता जताई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘शेड्यूल H’ और ‘शेड्यूल X’ श्रेणी की दवाएं बिना रजिस्टर्ड डॉक्टर के वैध पर्चे के नहीं बेची जा सकतीं। दवाओं की इस तरह की ऑनलाइन बिक्री पब्लिक हेल्थ के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। विभाग ने कंपनियों को चेतावनी दी है कि वे खुद को केवल मध्यस्थ न समझें, बल्कि एक ‘गेटकीपर’ की जिम्मेदारी निभाएं ताकि कोई अपराधी इनका फायदा न उठा सके।

बैठक में शामिल हुईं देश की दिग्गज कंपनियां

इस महत्वपूर्ण बैठक में अमेजन, फ्लिपकार्ट, बिग बास्केट, स्विगी और टाटा 1-एमजी जैसी करीब एक दर्जन से अधिक बड़ी कंपनियां मौजूद थीं। इनके अलावा नेटमेड्स, स्नैपडील, रिलायंस रिटेल, इंडिया मार्ट, पोर्टर और नायका के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। पुलिस ने साफ कर दिया है कि इन कंपनियों को बेचने वालों की जानकारी कानून के अनुसार तुरंत पुलिस को मुहैया करानी होगी। अगर इन प्लेटफॉर्म के जरिए भविष्य में किसी भी प्रतिबंधित वस्तु की बिक्री पाई गई, तो कंपनी के प्रबंधन पर सीधी जवाबदेही तय होगी।

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