Badaun News: उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में कभी घने और ऊंचे पेड़ों की छांव मुसाफिरों की थकान मिटाया करती थी, लेकिन अब यह गुजरे जमाने की बात होती जा रही है। विकास की अंधी दौड़ और सड़कों के चौड़ीकरण ने जिले की प्राकृतिक सुंदरता को उजाड़ कर रख दिया है। अब हाईवे के किनारे बड़े और छायादार पेड़ किसी सपने की तरह लगने लगे हैं। गांवों से लेकर मुख्य मार्गों तक, हरियाली के नाम पर अब केवल गिने-चुने पेड़ ही शेष बचे हैं।
ग्रीन बेल्ट की बर्बादी और हाईवे निर्माण का असर
बरेली-मथुरा हाईवे पर चल रहे निर्माण कार्य ने यहाँ की दशकों पुरानी ग्रीन बेल्ट को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। वर्षों पुराने विशालकाय पेड़ों को सड़क चौड़ी करने के नाम पर बेरहमी से काट दिया गया है। वर्तमान में केवल मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे और दातागंज मार्ग पर ही कुछ पुराने पेड़ बचे हैं, जो इस मार्ग को ‘ठंडी सड़क’ की पहचान देते हैं। लेकिन इन मार्गों पर भी अब कुल्हाड़ी चलने का खतरा मंडराने लगा है, जिससे पर्यावरण प्रेमी चिंतित हैं।
विरासत के रूप में पहचाने जाने वाले पेड़ हुए गायब
जिले में कई स्थान ऐसे थे जो केवल वहां मौजूद विशाल पेड़ों के नाम से पहचाने जाते थे। मुरादाबाद-फर्रुखाबाद हाईवे पर भगवतीपुर के पास स्थित वर्षों पुराने आम के पेड़ कभी मील का पत्थर हुआ करते थे। लोग दूर-दराज से आने वालों को इन्हीं पेड़ों के पास रुकने का पता देते थे। दुर्भाग्यवश, आंधी और मानवीय हस्तक्षेप के कारण अब इनमें से अधिकांश पेड़ धराशायी हो चुके हैं। पहचान के ये प्राकृतिक प्रतीक अब धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमटते जा रहे हैं।
अवैध कटान का केंद्र बने सहसवान और मुजरिया
जिले के सहसवान, बिसौली और मुजरिया इलाकों में पिछले कुछ वर्षों में पेड़ों का अंधाधुंध कटान हुआ है। सबसे ज्यादा नुकसान मुजरिया क्षेत्र में देखा गया है, जहाँ बेशकीमती आम और नीम के हरे पेड़ों को धड़ल्ले से काटा गया। वन विभाग की निष्क्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि भारी कटान के बावजूद कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई है। हालांकि, हाल ही में मुजरिया थाने में एक प्राथमिकी दर्ज हुई है, जो लंबे समय बाद की गई पहली बड़ी कार्रवाई है।
भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी हरियाली और अधिकारियों पर गाज
पेड़ कटवाने और अवैध कटान को संरक्षण देने के मामले में वन विभाग की छवि भी धूमिल हुई है। पिछले एक साल के दौरान विभाग के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है, जिसके चलते वन दारोगा समेत कई बड़े अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। जांच में पाया गया कि अधिकारियों की मिलीभगत से ही माफियाओं ने करोड़ों की लकड़ी गायब कर दी। प्रशासन की इस सख्ती के बावजूद चोरी-छिपे कटान की खबरें अब भी सुर्खियां बनी हुई हैं।
दातागंज मार्ग भी अब बनेगा ‘उजड़ी सड़क’
बदायूं-दातागंज मार्ग, जो अपनी हरियाली के लिए प्रसिद्ध है, जल्द ही अपना अस्तित्व खोने वाला है। सात मीटर चौड़ी इस सड़क को अब दस मीटर करने का प्रस्ताव पास हो चुका है और इसके लिए बजट भी जारी कर दिया गया है। इस परियोजना की बलि चढ़ने के लिए 400 से ज्यादा पुराने पेड़ों को चिन्हित किया गया है। जैसे ही कटान शुरू होगा, ‘ठंडी सड़क’ के नाम से जाना जाने वाला यह खूबसूरत रास्ता एक ‘उजड़ी सड़क’ में तब्दील हो जाएगा।


