कानपुर में नजूल भूमि घोटाला: 206 करोड़ की सरकारी जमीन ‘सफेदपोशों’ ने डकारी, पुलिस की रडार पर बड़े नाम!

Uttar Pradesh News: कानपुर शहर में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे और उनकी खरीद-बिक्री के एक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। जिला प्रशासन ने अब तक हुई जांच में पाया कि लगभग 206 करोड़ रुपये से अधिक की नजूल संपत्तियों को भू-माफियाओं ने मिलीभगत कर बेच दिया है। सबसे चौंकाने वाला मामला सिविल लाइन्स स्थित सीबीसीआईडी दफ्तर की जमीन का है। पुलिस ने इस घोटाले की जड़ तक जाने के लिए प्रशासन से सभी जरूरी दस्तावेज मांगे हैं।

सीबीसीआईडी दफ्तर की जमीन अमेरिका से बेची गई

सिविल लाइन्स स्थित नजूल भूमि के ब्लॉक-14 में संचालित सीबीसीआईडी कार्यालय की जमीन को धोखाधड़ी से बेचने का मामला सामने आया है। तरंग बेरी, नीरज बेरी, विकास बेरी और मनका शर्मा नामक आरोपितों ने इस जमीन का बैनामा अहमद ऐतिशाम और एसए बिल्ड प्राइवेट लिमिटेड के नाम कर दिया। आरोपित तीन भाई और एक बहन हैं, जो फिलहाल अमेरिका के अलग-अलग शहरों में रह रहे हैं। लगभग 24.77 करोड़ रुपये की इस कीमती जमीन पर अवैध रूप से अपार्टमेंट भी बना दिए गए हैं।

करोड़ों की जमीन पर संगठित गिरोह का कब्जा

नजूल भूमि घोटाले का दूसरा बड़ा मामला सिविल लाइन्स के ब्लॉक-14 स्थित प्लॉट संख्या-6 का है। यहां अमित पांडेय के खिलाफ करीब 14.89 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे और उपयोग का मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं, तीसरा और सबसे बड़ा प्रकरण ब्लॉक-15 का है, जहां जितेंद्र, नरेंद्र और नागेंद्र सिंह ने मिलकर करीब 166.60 करोड़ रुपये की जमीन की बंदरबांट की। प्रशासन इन सभी मामलों में संगठित गिरोह और अधिकारियों की संलिप्तता की गहन जांच कर रहा है।

सरकारी संपत्ति बचाने के लिए सख्त कानूनी कार्रवाई

कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि नजूल भूमि पूरी तरह सरकारी संपत्ति है और इसका बिना अनुमति हस्तांतरण अवैध है। बीते एक साल में प्रशासन ने राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ तीन महत्वपूर्ण एफआईआर दर्ज कराई हैं। दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने के साथ-साथ इन जमीनों पर पुनः सरकारी कब्जा लेने (पुनःप्रवेश) की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। घोटाले में शामिल किसी भी रसूखदार को बख्शा नहीं जाएगा।

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