United States News: अमेरिकी सीनेटरों के एक द्विदलीय समूह ने डॉलर को दुनिया की प्रमुख रिजर्व करेंसी बनाए रखने के लिए सीनेट में फिर से एक प्रस्ताव पेश किया है। सीनेटर टेड बड और जीन शाहीन ने चीन की बढ़ती आर्थिक विस्तारवादी नीतियों पर गहरी चिंता जताई है। उनका मानना है कि चीन अपनी मुद्रा ‘युआन’ के इर्द-गिर्द एक समांतर वैश्विक वित्तीय प्रणाली खड़ा करने की कोशिश कर रहा है। सीनेटरों ने चेतावनी दी कि यदि युआन का अंतरराष्ट्रीयकरण सफल रहा, तो यह अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।
चीन की समांतर वित्तीय प्रणाली से वैश्विक खतरा
सीनेटर टेड बड ने प्रस्ताव के माध्यम से बीजिंग की मंशा को उजागर किया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सफलता डॉलर के ग्लोबल रिजर्व करेंसी बने रहने पर निर्भर है। चीन सालों से अमेरिकी आर्थिक हितों को निशाना बनाकर अपना दबदबा बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। बड के अनुसार चीन को दूसरा वित्तीय बुनियादी ढांचा बनाने की अनुमति देना एक बड़ी नीतिगत विफलता होगी। इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था का विभाजन हो सकता है, जो विकासशील देशों की मुक्त बाजार वृद्धि को बाधित करेगा।
घटता डॉलर का हिस्सा और युआन का उदय
प्रस्ताव में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के आंकड़ों का हवाला देते हुए डॉलर के कमजोर होते दबदबे पर जोर दिया गया है। साल 1999 में वैश्विक मुद्रा भंडार में डॉलर की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत थी। साल 2025 की तीसरी तिमाही तक यह आंकड़ा घटकर 56.82 प्रतिशत के स्तर पर आ गया है। इस दौरान चीनी युआन ने अपनी पैठ बनाई है और अब इसकी हिस्सेदारी 1.93 प्रतिशत है। सीनेटरों ने चीन पर फिक्स्ड एक्सचेंज रेट के जरिए व्यापार असंतुलन पैदा करने का आरोप लगाया है।
चीन का ‘बेल्ट एंड रोड’ और पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर
अमेरिकी सांसदों ने चीन के ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ की ओर भी इशारा किया है। बीजिंग ने साल 2013 से अब तक दुनिया भर में करीब 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है। इससे विकासशील देशों की चीनी पूंजी पर निर्भरता बढ़ी है। इसके अलावा चीन का क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम (CIPS) स्विफ्ट (SWIFT) के विकल्प के रूप में उभर रहा है। अब तक 1,700 से ज्यादा बैंक इस सिस्टम से जुड़ चुके हैं। यह पैरेलल सिस्टम पश्चिमी देशों के आर्थिक प्रभाव को कम कर सकता है।
ताइवान संकट और राष्ट्रीय सुरक्षा की चुनौतियां
सीनेटर जीन शाहीन ने कहा कि डॉलर का वर्चस्व सीधे तौर पर अमेरिकी आर्थिक ताकत से जुड़ा है। ताइवान से जुड़े किसी भी सैन्य संकट या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शिपिंग लेन में रुकावट की स्थिति में चीन की वित्तीय प्रणाली पश्चिम के असर को कमजोर कर सकती है। प्रस्ताव में सुझाव दिया गया है कि अमेरिका को प्रमुख क्षेत्रों के साथ आर्थिक संबंध मजबूत करने चाहिए। विकासशील देशों में स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सहयोगियों के साथ मिलकर बीजिंग के वित्तीय प्रभाव का मुकाबला करना अब अनिवार्य हो गया है।


