World News: उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है। देश ने उच्च क्षमता वाले ठोस ईंधन मिसाइल इंजन का सफल परीक्षण किया है। इस परीक्षण का निरीक्षण खुद तानाशाह किम जोंग उन ने किया। यह परीक्षण उत्तर कोरिया के सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम का अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों को और अधिक घातक बनाना है।
इंजन की क्षमता में बड़ी वृद्धि, 2500 किलोटन पहुंची
उत्तर कोरियाके नए परीक्षण में इंजन की अधिकतम क्षमता करीब 2500 किलोटन मापी गई। यह पिछले परीक्षण (1971 किलोटन) से काफी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस क्षमता में वृद्धि का उद्देश्य मिसाइलों की मारक क्षमता और पेलोड को बढ़ाना है। इस इंजन में कंपोजिट कार्बन फाइबर जैसी उन्नत सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो मिसाइल को हल्का और अधिक शक्तिशाली बनाती है।
मल्टीपल वॉरहेड्स की तैयारी, अमेरिका के लिए नई चुनौती
रक्षाविशेषज्ञों का कहना है कि उत्तर कोरिया अब ऐसी मिसाइलें विकसित करना चाहता है जिनमें एक साथ कई वॉरहेड लगाए जा सकें। इससे एक ही मिसाइल कई लक्ष्यों को भेद सकती है। यह तकनीक दुश्मन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में भी सहायक होती है। जानकारों का मानना है कि यह तकनीक अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
सॉलिड-फ्यूल मिसाइलें क्यों हैं खतरनाक?
सॉलिड-फ्यूल मिसाइलोंकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इन्हें लॉन्च से पहले ज्यादा तैयारी की जरूरत नहीं होती। इससे इनका पता लगाना और इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है। आधुनिक युद्ध में इस तकनीक को गेम-चेंजर माना जाता है। उत्तर कोरिया लगातार अपनी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक को मजबूत कर रहा है।
किम जोंग उन ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
यह परीक्षण ऐसेसमय हुआ है जब किम जोंग उन हाल ही में उत्तर कोरिया को परमाणु शक्ति घोषित कर चुके हैं। उन्होंने अमेरिका पर आक्रामक नीतियों का आरोप लगाया और देश की सुरक्षा मजबूत करने की जरूरत बताई। विशेषज्ञों का मानना है कि सॉलिड-फ्यूल तकनीक और मल्टीपल वॉरहेड क्षमता का संयोजन अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नई चिंता पैदा कर सकता है। इस परीक्षण के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के साथ तनाव और बढ़ने की आशंका है।


