World News: ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध ने ईरान के सत्ता ढांचे को बुरी तरह हिलाकर रख दिया है। 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों में सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई समेत कई शीर्ष सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए हैं। इसराइल ने अब किसी भी वरिष्ठ ईरानी अधिकारी को बिना अतिरिक्त मंजूरी के निशाना बनाने का अधिकार दे दिया है। आइए जानते हैं कि ईरान के पावर स्ट्रक्चर में अब किसका दबदबा है।
आयतुल्लाह अली खामेनेई: तीन दशक के शासन का अंत
86 वर्षीय सर्वोच्च नेताअली खामेनेई 28 फरवरी को पहले ही दिन मारे गए। वह तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान के सबसे ताकतवर व्यक्ति रहे। वह राष्ट्राध्यक्ष और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ थे। उनके बाद सत्ता में आए नए नेतृत्व में अब तक स्थिरता नहीं दिखी है।
मोजतबा खामेनेई: नए सुप्रीम लीडर, लेकिन अनदेखे
अलीखामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को 8 मार्च को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया। लेकिन उनकी नियुक्ति के बाद से उनका कोई वीडियो या तस्वीर सामने नहीं आई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया है कि वह ‘घायल और शायद पंगु’ हो गए हैं। उनके पिता, भाई और मां 28 फरवरी के हमलों में मारे गए थे।
अली लारिजानी: सुरक्षा परिषद के प्रमुख की मौत
68 वर्षीय अलीलारिजानी 17 मार्च को तेहरान के पारदिस इलाके में हुए हमले में मारे गए। वह सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव थे। खामेनेई के बाद वह हमलों में मारे गए सबसे वरिष्ठ अधिकारी थे। वह पूर्व रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कमांडर और ईरानी संसद के सबसे लंबे समय तक स्पीकर रहे।
अली शमखानी: खामेनेई के करीबी सलाहकार का निधन
रियर एडमिरल अलीशमखानी 28 फरवरी को मारे गए। वह ईरान की रक्षा परिषद के सचिव और खामेनेई के करीबी सलाहकार थे। वह ईरान के एकमात्र रियर एडमिरल थे। उन्होंने रक्षा मंत्री, नौसेना कमांडर और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव जैसे कई अहम पद संभाले थे।
अब्दुलरहीम मुसावी और मोहम्मद पाकपोर: सेना के शीर्ष कमांडर भी मारे गए
ईरानीसशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के प्रमुख मेजर जनरल अब्दुलरहीम मुसावी और आईआरजीसी के कमांडर-इन-चीफ मेजर जनरल मोहम्मद पाकपोर दोनों 28 फरवरी को मारे गए। पाकपोर 16 साल तक आईआरजीसी की ग्राउंड फोर्स के कमांडर रहे थे।
मसूद पेजेश्कियान और अब्बास अरागची: अब कौन संभाल रहा कमान?
राष्ट्रपतिमसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अरागची अब भी जीवित हैं। अरागची ने स्पष्ट किया है कि ईरान ने कभी युद्धविराम नहीं मांगा। संसद स्पीकर मोहम्मद बागर गलीबाफ अब युद्ध प्रयासों का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है और ईरान हमलावरों को करारी सजा देगा। फिलहाल ईरान का सत्ता ढांचा अमेरिका-इजरायल के लगातार हमलों से बुरी तरह प्रभावित हुआ है।


