Delhi News: विदेश मंत्रालय ने इस साल की प्रसिद्ध कैलाश मानसरोवर यात्रा की शुरुआत कर दी है। श्रद्धालुओं का पहला जत्था 15 जून 2026 को देश की राजधानी दिल्ली से सिक्किम के नाथू ला दर्रे के लिए रवाना हो चुका है। इस पहले जत्थे में कुल 10 दल शामिल हैं, जो बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे।
उत्तराखंड के रास्ते जाने वाला तीर्थयात्रियों का पहला दल 04 जुलाई को उत्तराखंड की सीमा में प्रवेश करेगा। इस मार्ग की यात्रा में भी कुल 10 दल शामिल किए गए हैं। कुमाऊं मंडल विकास निगम ने इस मार्ग पर यात्रियों के सुगम आवागमन के लिए 12 विशेष वाहनों की मजबूत व्यवस्था की है।
लिपुलेख दर्रे के रास्ते से इस बार कुल 500 श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर की कठिन यात्रा को पूरा करेंगे। इस मार्ग के प्रत्येक दल में 50 श्रद्धालुओं को शामिल किया गया है। श्रद्धालुओं का यह पहला आधिकारिक जत्था 10 जुलाई को तिब्बत की अंतरराष्ट्रीय सीमा में प्रवेश कर अपनी आगे की यात्रा शुरू करेगा।
हिंदू धर्म की पवित्र मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का स्थायी निवास कैलाश मानसरोवर ही है। पौराणिक ग्रंथों में यहां स्थित पवित्र झील की परिक्रमा को सबसे विशेष और पुण्यदायी माना गया है। कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील की गहरी धार्मिक मान्यता बौद्ध और जैन धर्म में भी समान रूप से है।
समुद्र तल से इस अलौकिक कैलाश पर्वत और पवित्र मानसरोवर झील की कुल ऊंचाई लगभग 6,638 मीटर है। अत्यधिक ऊंचाई और कठिन चढ़ाई के कारण यह यात्रा दुनिया के सबसे दुर्गम रास्तों में गिनी जाती है। इसलिए यात्रियों के लिए इस यात्रा से जुड़े सभी महत्वपूर्ण नियमों और खर्चों को जानना आवश्यक है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन और जरूरी दस्तावेज
कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने के लिए विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य है। इस साल यात्रा के लिए आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 19 मई 2026 निर्धारित की गई थी। केवल वैध भारतीय पासपोर्ट रखने वाले नागरिक ही इस पवित्र यात्रा के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इस कठिन यात्रा के लिए आपके पास कम से कम 6 महीने की वैधता वाला पासपोर्ट होना चाहिए। इसके साथ ही ताजा पासपोर्ट साइज फोटो, पहचान पत्र (पैन कार्ड या अन्य वैध दस्तावेज), मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट, व्यापक यात्रा बीमा और चीन का आधिकारिक वीजा या परमिट होना बेहद अनिवार्य नियम माना गया है।
यात्रा के आधिकारिक मार्ग और कुल खर्च की पूरी जानकारी
भारतीय नागरिकों के लिए विदेश मंत्रालय दो मुख्य आधिकारिक तीर्थयात्रा मार्गों का संचालन पूरी सुरक्षा के साथ करता है। पहला मार्ग उत्तराखंड का लिपुलेख दर्रा है। इस रास्ते में दिल्ली से काठगोदाम, पिथौरागढ़, धारचुला और लिपुलेख दर्रे से होते हुए तिब्बत के ताकलाकोट और फिर सीधे कैलाश मानसरोवर पहुंचा जाता है।
लिपुलेख दर्रे के इस पारंपरिक रास्ते से कैलाश मानसरोवर पहुंचने में लगभग 22 से 25 दिन का लंबा समय लगता है। भारतीय तीर्थयात्रियों के बीच यह पुराना रास्ता हमेशा से बेहद लोकप्रिय रहा है। दूसरा मार्ग सिक्किम का नाथू ला दर्रा है, जो ज्यादातर मोटर वाहनों से आसानी से सुलभ हो जाता है।
सिक्किम के नाथू ला दर्रे वाले मार्ग से यात्रा काफी आरामदायक होती है और इसमें लगभग 21 दिन लगते हैं। नेपाल और चीन की तरफ से आने वाले विदेशी यात्रियों के लिए तीसरा मार्ग तिब्बत की राजधानी ल्हासा की ओर से जाता है, जो पूरी तरह से अंतरराष्ट्रीय नियमों के अधीन संचालित होता है।
इस पवित्र यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का अंतिम चयन कंप्यूटर द्वारा रैंडम लॉटरी यानी लकी ड्रॉ के माध्यम से पूरी तरह पारदर्शी तरीके से किया जाता है। भारत सरकार की ओर से इस यात्रा का आधिकारिक खर्च लगभग 2,09,000 रुपये प्रति व्यक्ति आता है, जिसमें सभी बुनियादी सुविधाएं शामिल होती हैं।
अगर कोई तीर्थयात्री नेपाल के रास्ते से इस यात्रा पर जाना चाहता है, तो वहां प्रति व्यक्ति खर्च लगभग 2,30,000 रुपये से लेकर 3,00,000 रुपये तक हो सकता है। मई के मध्य से लेकर सितंबर तक का समय कैलाश मानसरोवर की यात्रा के लिए मौसम के लिहाज से सबसे उत्तम माना जाता है।
Author: Harish Rawat


