ग़ज़ा जा रहे राहत बेड़े पर इसराइली कमांडो का हिंसक हमला, घुटनों पर बैठे कार्यकर्ताओं का उड़ाया क्रूर मज़ाक

Gaza News: इसराइली नौसेना ने ग़ज़ा की ओर राहत सामग्री ले जा रहे अंतरराष्ट्रीय नागरिक बेड़े पर बीच समंदर में धावा बोल दिया। सेना ने फ़लस्तीन समर्थक निहत्थे कार्यकर्ताओं को बंधक बना लिया है। इसराइली सुरक्षा बलों की इस हिंसक सैन्य कार्रवाई की वैश्विक स्तर पर तीखी आलोचना हो रही है।

अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस समेत कई ताकतवर देशों ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। इसराइल के धुर दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर के एक शर्मनाक वीडियो ने इस विवाद को और भड़का दिया है। वीडियो में वह बंदी बनाए गए लोगों का मज़ाक उड़ा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इसराइली कमांडो की बड़ी सैन्य कार्रवाई

ग्लोबल सुमुद फ़्लोटिला के बैनर तले 50 से ज़्यादा नावें पिछले गुरुवार को तुर्की से रवाना हुई थीं। इन नावों में 40 से अधिक देशों के 430 मानवाधिकार कार्यकर्ता सवार थे। इनका मुख्य उद्देश्य ग़ज़ा पट्टी के नागरिकों तक शिशु आहार, दवाएं और जरूरी भोजन पहुंचाना था।

हथियारबंद इसराइली नौसैनिक कमांडो ने साइप्रस के पश्चिम में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इस शांतिपूर्ण बेड़े को बलपूर्वक घेर लिया। आयोजकों ने बताया कि इसराइली सैनिकों ने नावों पर अंधाधुंध वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। उन्होंने जानबूझकर एक बड़े जहाज़ को सीधी टक्कर भी मारी।

हिरासत केंद्र में बेन-ग्विर ने कार्यकर्ताओं को किया अपमानित

इसराइली नौसेना सभी विदेशी नागरिकों को जबरन बंधक बनाकर अशदोद बंदरगाह ले आई। इसके बाद राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने इस हिरासत केंद्र का दौरा किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक विवादित वीडियो पोस्ट कर लिखा कि इसराइल में आपका स्वागत है।

वीडियो में सुरक्षाकर्मी एक महिला प्रदर्शनकारी को बर्बरता से ज़मीन पर पटकते दिख रहे हैं। वहीं बेन-ग्विर हाथ बंधे और घुटनों के बल बैठे डरे हुए विदेशी नागरिकों के सामने हिब्रू में चिल्ला रहे हैं कि हम ही यहां के असली मालिक हैं। यह फुटेज वायरल हो चुका है

वैश्विक नेताओं ने इसराइली राजदूतों को किया तलब

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने इस अमानवीय व्यवहार को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने कहा कि मानवीय गरिमा का ऐसा खुला उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इटली, फ्रांस, फ्रांस, स्पेन और कनाडा ने सख्त कदम उठाते हुए अपने यहां इसराइली राजदूतों को तलब किया है।

ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इस पूरे घटनाक्रम को पूरी तरह शर्मनाक दृश्य करार दिया है। उन्होंने तेल अवीव से इस दुर्व्यवहार पर तुरंत आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन अदाला ने पीड़ितों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की है।

नेतन्याहू ने भी की अपने ही कैबिनेट मंत्री की निंदा

इस बड़े कूटनीतिक विवाद के बाद इसराइल सरकार रक्षात्मक मुद्रा में आ गई है। प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने एक आधिकारिक बयान जारी कर बेन-ग्विर की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं के साथ मंत्री का ऐसा बर्ताव इसराइल के नैतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।

इसराइल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने भी बेन-ग्विर को जमकर फटकारा। उन्होंने कहा कि इस घटिया हरकत ने दुनिया के सामने देश की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अब सभी विदेशी प्रदर्शनकारियों को जल्द से जल्द डिपोर्ट करने का आदेश दिया है।

ग़ज़ा में भुखमरी और बदहाली का कहर जारी

संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार ग़ज़ा में जमीनी हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। पिछले साल अक्टूबर में हुए अस्थाई युद्धविराम के बाद भी 21 लाख की आबादी तंबू में रहने को मजबूर है। वहां साफ पानी और दवाओं का भारी संकट बना हुआ है।

इसराइल ने राहत सामग्री के आयात पर कई तरह के कड़े प्रतिबंध लगा रखे हैं। इसके कारण संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता अभियान बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 से जारी इस भीषण जंग में अब तक 72,770 से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं।

Author: Pallavi Sharma

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