Beijing News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों चीन के अहम दौरे पर हैं। बीजिंग पहुंचने पर उनका बेहद शानदार स्वागत किया गया। टैरिफ युद्ध और पुरानी कड़वाहट के बीच ऐसा भव्य नजारा देखकर पूरी दुनिया हैरान है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस स्वागत की योजना बहुत सोच-समझकर बनाई है। इसके जरिए ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल से एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया गया है। यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों में एक नया और दिलचस्प अध्याय जोड़ रहा है।
बीजिंग ने इस मुलाकात को बेहद रणनीतिक ढंग से पेश किया है। इस भव्य स्वागत का असर चीन और वैश्विक मंच पर दिख रहा है। ट्रंप की यात्रा शी जिनपिंग के लिए फायदे का बड़ा सौदा बनी है। इस दौरे से चीन ने खुद को अमेरिका के बराबर खड़ा किया है। शी जिनपिंग वैश्विक कूटनीति में इसी बराबरी की मांग लगातार करते रहे हैं। यह कदम चीन के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत मानी जा रही है।
हाल के कुछ वर्षों में ट्रंप ने चीन की लगातार कड़ी आलोचना की थी। उन्होंने चीनी सामानों पर पांच सौ प्रतिशत तक भारी टैरिफ भी लगा दिया था। ऐसे आक्रामक कदमों के बावजूद दोनों नेताओं का यूं गर्मजोशी से मिलना चौंकाता है। यह मुलाकात पुराने सभी विवादों को पीछे छोड़ती हुई नजर आती है। एक-दूसरे के साथ बराबरी और सम्मान से पेश आना कूटनीति की दिशा बदल रहा है। यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति के नए समीकरणों को जन्म दे रहा है।
भू-राजनीति में चीन की बढ़ती ताकत
ट्रंप के इस ऐतिहासिक दौरे का समय बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका इस वक्त पश्चिम एशिया के तनाव में बुरी तरह उलझा है। वहीं चीन खुद को वैश्विक शांति लाने वाली बड़ी ताकत बता रहा है। वह दुनिया में कूटनीति के मुख्य स्तंभ के रूप में उभर रहा है। जिनपिंग की ट्रंप से मुलाकात दुनिया को साफ संदेश देती है। चीन दिखाना चाहता है कि वह वैश्विक संकट हल करने में एक बहुत जरूरी साझीदार बन चुका है।
अमेरिकी कारोबारियों का भारी जमावड़ा
राष्ट्रपति ट्रंप की इस यात्रा में अमेरिकी बिजनेस लीडर्स के दल ने सबका ध्यान खींचा है। एलन मस्क और टिम कुक जैसी दिग्गज हस्तियां ट्रंप के साथ बीजिंग पहुंची हैं। ये सभी नेता अपने चीनी समकक्षों के साथ अहम व्यापारिक बातचीत कर रहे हैं। अमेरिकी दिग्गजों की मौजूदगी बीजिंग को जोरदार आर्थिक ताकत देती है। यह साफ दिखाता है कि अमेरिकी कारोबारी हित आज भी चीन के विशाल बाजार और निर्माण तंत्र से बहुत ही गहराई से जुड़े हुए हैं।
अमेरिकी सीईओ का जमावड़ा शी जिनपिंग के आर्थिक दावों को मजबूत करता है। चीन हमेशा से कहता आया है कि वह वैश्विक व्यापार के लिए बेहद जरूरी है। राजनीतिक स्तर पर भारी टकराव के बावजूद अमेरिकी कंपनियों की सफलता चीन पर निर्भर है। चीनी ग्राहकों और सप्लाई चेन तक उनकी आसान पहुंच आज भी सबसे अहम मुद्दा है। दोनों देशों के बीच यह नया तालमेल अंतरराष्ट्रीय व्यापार और कूटनीति की पुरानी धारणाओं को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।

