ईरान और कतर के बीच 6 बिलियन डॉलर की ‘सीक्रेट डील’! मिडिल ईस्ट में मची भारी खलबली, अमेरिका हैरान

World News: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ी और हैरान करने वाली खबर सामने आई है। कतर और ईरान के बीच एक ‘सीक्रेट डील’ होने की चर्चा ने पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है। इस कथित गुप्त समझौते का सीधा असर अब जमीन पर भी दिखने लगा है। ईरान ने अचानक कतर पर अपने मिसाइल और ड्रोन हमले काफी कम कर दिए हैं। बदले में ईरान को अरबों डॉलर मिलने की बात कही जा रही है।

ईरान को मिलेंगे 6 बिलियन डॉलर?

इस डील के तहत एक बड़ी शर्त रखी गई है। ईरान अब कतर के अहम तेल और गैस ठिकानों पर हमला नहीं करेगा। इसके बदले में ईरान को लगभग 6 बिलियन डॉलर की भारी रकम मिल सकती है। यह पैसा मूल रूप से 2023 में अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक कैदी समझौते से जुड़ा है। अब ऐसा माना जा रहा है कि यह विशाल राशि सीधे ईरान की खतरनाक सैन्य इकाई ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर’ (IRGC) के हाथों में पहुंच सकती है। इस युद्ध में आईआरजीसी बहुत अहम भूमिका निभा रही है।

कतर ने अमेरिका-ईरान युद्ध से बनाई दूरी

इस संभावित समझौते के तीन बड़े और गहरे असर सामने आए हैं। सबसे पहली बात, कतर ने अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी तरह की मध्यस्थता करने से साफ इनकार कर दिया है। आपको याद होगा कि कतर ने पहले अमेरिका और तालिबान के बीच दोहा समझौते में बड़ी भूमिका निभाई थी। लेकिन इस बार कतर ने खुद को इस बड़े विवाद से पूरी तरह अलग कर लिया है। कतर ने साफ शब्दों में कह दिया है कि यह उसकी जंग बिल्कुल नहीं है।

कतर नहीं करेगा अमेरिका की सैन्य मदद

कतर ने एक और बहुत बड़ा बयान दिया है। उसने साफ किया है कि वह न तो ईरान पर कोई हमला करेगा और न ही अमेरिका को अपनी जमीन से सैन्य मदद देगा। इस बयान से कतर की भविष्य की रणनीति बिल्कुल साफ हो गई है। इसका तीसरा सबसे बड़ा असर हमलों में कमी के रूप में दिखा है। 20 मार्च के बाद से ईरान ने कतर पर कोई भी बड़ा हमला नहीं किया है। इससे पहले ईरान ने रास लाफान औद्योगिक शहर जैसे कतर के अहम ऊर्जा केंद्रों पर भारी बमबारी की थी।

कतर को उठाना पड़ा है भारी नुकसान

इस कथित सीक्रेट डील के बावजूद कतर को अब तक बहुत भारी नुकसान झेलना पड़ा है। ईरानी हमलों में कतर के कई मासूम नागरिकों की जान जा चुकी है। इसके अलावा कई लोग बुरी तरह घायल भी हुए हैं। इन हमलों ने कतर की गैस उत्पादन क्षमता पर भी बहुत बुरा असर डाला है। इसका सीधा असर दुनिया भर की ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है और गैस की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

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